नई दिल्ली: जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर, यह वह देश हैं जहां एक समय में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन फिर इन देशों ने संक्रमण के प्रसार पर ऐसी लगाम लाई कि इसके फैलने की रफ्तार को काफी धीमे हो गई। अब पहले के मुकाबले इन देशों में काफी कम रफ्तार से संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन, क्या आपने सोचा है कि बिना वैक्सीन के ऐसा कैसे संभव हुआ? हम बताते हैं, नीचे पढ़िए-
मास्क बना 'ब्रह्मास्त्र'
कोरोना से बचने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने मास्क पहनने की सलाह दी और जापान, दक्षिण कोरिया तथा सिंगापुर ने इसे अति गंभीरता के साथ लिया। इन देशों ने बड़े पैमाने पर यह सुनिश्चित किया कि लोग मास्क जरूर पहन कर रखे। इन देशों के लोगों ने मास्क पहनने के नियमों का बेहतरी के साथ पालन किया और यही वजह बनी कि यहां तेजी से फैलते कोरोना वायरस पर काफी हद तक लगाम लगी सकी।
फिलहाल मास्क ही वैक्सीन है!
पिछले दिनों न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। रिपोर्ट में वैज्ञानिकों द्वारा कहा गया था कि अगर सभी लोग पूरी सतर्कता के साथ और सही तरीके से कपड़े से बना मास्क पहनें, तो यह वैक्सीन की तरह ही काम करता है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर सभी लोग मास्क का इस्तेमाल करें तो संक्रमित व्यक्ति के मुंह से निकले वाले ड्रॉपलेट्स वातावरण में नहीं फैलेंगे या फिर अगर फैलते भी हैं तो काफी कम मात्रा में फैलेंगे।
'बेनिफिट ऑफ डाउट' भी मास्क को दें
अंग्रेजी में कहा जाता है- 'बेनिफिट ऑफ डाउट'। इसका मतलब है- संदेह की स्थिति में लाभ। यहां इसका जिक्र इसलिए हो रहा है क्योंकि कोरोना के कई मरीज एसिम्प्टोमेटिक होते हैं यानि उनमें कोरोना के लक्षण नजर नहीं आते। ऐसे में बिना मास्क के जब वह बाहर निकते हैं तो कोरोना के फैसने का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में इसी संदेह को ध्यान में रखते हुए मास्क और ज्यादा जरूरी हो जाता है। इसलिए बेहतर है कि मास्क जरूर ही पहन कर रखें।
कौन सा मास्क है ज्यादा सुरक्षित?
कोरोना वायरस फैसले के शुरुआती दिनों में N-95 मास्को को ज्यादा सुरक्षित बताया गया था लेकिन बाद में विशेषज्ञों ने माना कि सूती कपड़े से बने मास्क संक्रमण से बचाव के लिए सबसे ज्यादा कारगर साबित होते हैं। अब विशेषज्ञ सूती कपड़े से बने मास्क का ही सुझाव देते हैं।
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