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Hindi News भारत राष्ट्रीय चीन की 'अंडरकवर' साजिश पर बड़ा खुलासा, क्या ड्रैगन के टारगेट पर भारत के टॉप नेता हैं?

चीन की 'अंडरकवर' साजिश पर बड़ा खुलासा, क्या ड्रैगन के टारगेट पर भारत के टॉप नेता हैं?

चीन की जो कंपनी जेनहुआ डेटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी भारत के 10 हजार से ज्यादा लोगों और संगठनों की जासूसी करा रही है। इस कंपनी का हैडक्वार्टर चीन के शेनजेन में है।

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नई दिल्ली: चीन की जो कंपनी जेनहुआ डेटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी भारत के 10 हजार से ज्यादा लोगों और संगठनों की जासूसी करा रही है। इस कंपनी का हैडक्वार्टर चीन के शेनजेन में है। ये कंपनी जिन लोगों का डेटा इकट्ठा कर रही है। उनमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केन्द्र सरकार के ज्यादातर मंत्री ममता बनर्जी, अशोक गहलोत, कैप्टन अमरिन्दर सिंह, योगी आदित्यनाथ, हेमेन्त सोरेन, शिवराज सिंह चौहान, त्रिवेन्द्र रावत, नीतीश कुमार, नवीन पटनायक, उद्धव ठाकरे समेत करीब दो दर्जन मुख्यमंत्री। डेढ़ दर्जन पूर्व मुख्यमंत्री, करीब 350 MP के अलावा सोनिया गांधी और उनके परिवार, ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनका परिवार और स्वर्गीय पी  संगमा का परिवार शामिल है। 

जेनहुआ डेटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ के साथ-साथ तीनों सेनाओं के चीफ, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के 60 सर्विंग अफसरों के साथ 15 रिटायर्ड आर्मी, नेवी और एयरफोर्स चीफ की जासूसी कर रही थी। देश में सुरक्षा से जुड़ी जितनी भी बड़ी रिसर्च और प्रोडक्शन एजेंसीज है। उन सबके  हैड इस कंपनी की जासूसी लिस्ट में थे। 

अब आप सोच सकते हैं कि कितने बड़े पैमाने पर जासूसी का काम हो रहा था। इनके अलावा भारत के चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएम खानविलकर और CAG के प्रमुख जीसी मुर्मू पर भी चीनी कंपनी नजर रखती है। रतन टाटा और गौतम अडानी जैसे देश के कई बड़े उद्योगपति भी इस कंपनी की जासूसी लिस्ट में शामिल हैं। 

इन लोगों की जासूसी क्यों हो रही थी और जासूसी का तरीका क्या है?

अब सवाल ये है कि इन लोगों की जासूसी क्यों हो रही थी और जासूसी का तरीका क्या है? इस सवाल का जबाव तो बहुत सीधा सा है। ये कंपनी चीन की सरकार के लिए काम कर रही थी। डेटा को एनालाइस करके चाइनीज स्टैबलिसमेंट को देती है। जेनहुआ डेटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कंपनी का चीनी सरकार और वहां की कम्युनिस्ट पार्टी से करीबी रिश्ता है। ये बात तो समझ में आती है कि हमारे नेताओं और हमारे फौजी अफसरों के बारे में जानकारी का इस्तेमाल चीन कर सकता है लेकिन सवाल ये है कि चीन हमारे जजेज नेताओं के परिवार, चीफ मिनिस्टर्स और उद्योगपतियों के बारे में जानकारी इक्कठा करके क्या करेगा। 

दरअसल आजकल जंग सिर्फ हथियारों से नहीं लड़ी जाती इन्फॉर्मेंशन आजकल बहुत बड़ा हथियार। चीन इस तरह से इन्फॉर्मेंशन को इक्कठा करने को हाइब्रिड वारफेयर का नाम देता रहा है। हाइब्रिड वारफेयर क्या है? ये बताने से पहले हम हम आपको ये बताते है कि जेनहुआ डेटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी लोगों का डेटा इक्कठा कैसे करती है। 

चीन की शातिर कंपनी जासूसी कैसे करती है? 

  • जेनहुआ डेटा इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सोशल मीडिया से उठाती है डेटा।
  • डेटा एनालिसिस के लिए चीन के 20 शहरों में सेंटर।
  • राजनीति, सरकार, कारोबार, मीडिया से जुड़े लोग टारगेट।
  • टारगेट को साइबर वर्ल्ड में सर्च किया जाता है।
  • इंटरनेट पर टारगेट की हर गतिविधि पर नजर।
  • टारगेट की गतिविधि का रिकॉर्ड रखा जाता है।
  • टारगेट के डिजिटल फुटप्रिंट पर पूरी नजर।
  • डेटा के आधार पर एक इंफॉर्मेशन लाइब्रेरी बनाई जाती है।
  • इस जानकारी को चीन की सरकार से शेयर किया जाता है।

जानें क्या होती है हाइब्रिड वॉर

हाइब्रिड वॉर एक नए किस्म की लड़ाई है। जिसे आम बोल-चाल की भाषा में छद्म युद्ध यानी प्रॉक्सी वॉर कहते हैं। हाइब्रिड वॉर में Traditional War को साइबर वॉर और साइकोलॉलिजकल वॉर के साथ ब्लेंड किया जाता है। ये लड़ाई सिर्फ हथियारों से नहीं लड़ी जाती। इस वॉर के जरिए जनता की सोच को धीरे धीरे बदला जाता है। हाइब्रिड वॉर के तहत अफवाहें गलत जानकारियां और फेक न्यूज फैलाई जाती हैं। लगातार ऐसा करते रहने से आम जनता की सोच बदलने लगती है। लोगों की भावनाओं को भड़काया जाता है। नेताओं को, ओपीनियन मेकर्स को, सेना को बदनाम किया जाता है। 

इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में ऐसा करना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान है। Traditional War हथियारों और आर्मी की ताकत के आधार पर लड़ी जाती है। इस तरह की लड़ाई में जान माल का नुकसान होता है जबकि HYBRID WAR इससे अलग है। इसके जरिए लगातार आम लोगों की सोच पर चोट की जाती है। हाइब्रिड वॉर में मिलिट्री का इस्तेमाल किए बिना अपना प्रभुत्व स्थापित करने पर जोर दिया जाता है। 

हाइब्रिड वॉर के जरिए मिलिट्री और हथियारों का इस्तेमाल किए बिना दूसरे देशों को नुकसान पहुंचाया जाता है या उन्हें प्रभावित किया जाता है। हाइब्रिड वॉर में नॉन-मिलिट्री टूल्स का इस्तेमाल होता है। इन टूल्स को इंफोर्मेशन पॉल्यूशन, परसेप्शन मैनेजमेंट या प्रोपेगैंडा कह सकते हैं। डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक 2006 में लेबनान युद्ध के दौरान हिज्बुल्लाह ने एक खास रणनीति का सहारा लिया था। हिज्बुल्लाह ने गलत जानकारियों और तथ्यों को अपने हिसाब से पेश कर लोगों की विचारधारा पर असर डाला  वक्त के साथ HYBRID WAR में टेक्नॉलजी भी जुड़ती जा रही है और अब ये काफी कॉमप्लेक्स हो गया है। HYBRID WAR का मुख्य हथियार साइबर स्पेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है। 

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