नई दिल्ली: चीन और भारत की एशिया में खुद को एक-दूसरे से ज्यादा ताकतवर साबित करने की होड़ नई बात नहीं है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में भारत ने इस मामले में बाजी मार ली है। चीन को टक्कर देते हुए उसने एशिया में अपनी खोई हुई जमीन वापस पा ली है। वहीं चीन लगातार पाकिस्तान के करीब आ रहा है, और भारत को समय-समय पर उकसाने की कोशिश कर रहा है। यही कारण है कि भारत लगातार चीन को लेकर सावधानी बरत रहा है। ये भी पढ़ें: इस ब्लड ग्रुप के लोग हैं एलियंस, कहीं आप भी तो उनमें से एक नहीं
इसी क्रम में जुलाई में हिंद महासागर में होने वाली भारत-अमेरिका-जापान की साझा वार्षिक नौसैनिक युद्धाभ्यास 'मालाबार' में शामिल होने को लेकर ऑस्ट्रेलिया की ओर से मांगी गई अनुमति को भारत ने ठुकरा दिया है, और साफ तौर पर मना कर दिया है। आपको बता दें कि हाल ही के दिनों में चीन और ऑस्ट्रेलिया काफी करीब आए हैं। चीन और ऑस्ट्रेलिया के व्यापार में काफी बढ़ोतरी हुई है।
न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स में छपी खबर के मुताबिक, कुछ समय पहले ही ऑस्ट्रेलिया की ओर से लिखित रुप में इस युद्धाभ्यास में शामिल होने की इजाजत मांगी गई थी जिसे भारत ने ठुकरा दिया है। साफ है कि चीन ने लगातार भारत की चिंता को बढ़ाया ही है। चीन की ओर से हिंद महासागर में श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश की तटीय सीमाओं पर लगातार अपनी सबमरीन की तैनाती की गई है, जो भारत के लिए चिंता का विषय है।
आपको बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच लगातार 1992 से इस प्रकार की साझा युद्धाभ्यास होती आई है। भारत और अमेरिका ने आपसी सहमति से 2014 में इस ड युद्धाभ्यास में जापान को भी शामिल किया था। गौरतलब है कि तीनों देशों के चीन के साथ संबंध अच्छे नहीं हैं, और उसकी ताकत को कम करने के लिए तीनों देशों का साथ आना चीन को खटकता है।
वहीं पिछले कुछ महीनों में कई मुद्दों को लेकर भारत तथा चीन के संबंधों में खटास बढ़ी है, जिनमें अत्याधुनिक परमाणु तकनीक तथा सामग्री की खरीद-फरोख्त को नियंत्रित करने वाले 48 देशों के संगठन न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की सदस्यता का चीन द्वारा विरोध किया जाना शामिल है।
चीन का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार भारत के धर्मशाला शहर में रह रहे निर्वासित तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की हालिया सार्वजनिक गतिविधियों के पीछे है, और चीन उन्हें खतरनाक अलगाववादी नेता मानता है।
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आखिर भारत में इसे क्यों कहा जाता है ‘उड़ता ताबूत’?
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