नई दिल्ली: जुलाई 2017 से भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंग पर परिवहन आरंभ हो जाएगा। इसकी लंबाई 9 किलोमीटर से ज्यादा है और यह श्रीनगर से करीब 170 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जम्मू और श्रीनगर के बीच इस सुरंग के जरिए चेनेनी और नशीरी को जोड़ा जायेगा। इसके जरिए करीब 30 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी और एक घंटे का सफर भी कम हो जाएगा। ये सुरंग 286 किमी लंबे जम्मू-श्रीनगर फोर लेन नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट का हिस्सा है जो बीच के सबसे मुश्किल इलाके और सबसे बड़ी बाधा को पार करती है।
इस सड़क सुरंग के बारे में खास बातें
- 286 किलोमीटर लंबी चार लेन वाली परियोजना का हिस्सा 9.2 किलोमीटर लंबी दोहरी ट्यूब सुरंग पर 23 मई 2011 को काम शुरू हुआ।
- यह सुरंग मार्ग 3,720 करोड़ रुपए की लागत बना है जो निचली हिमालय पर्वत श्रृंखला में बनाया गया है।
- 1200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह सुरंग भारत का पहला ऐसा मार्ग होगा जो विश्व स्तरीय ‘समेकित सुरंग नियंत्रण प्रणाली’ से लैस होगा और जिसमें हवा के आवागमन , अग्निशमन, सिग्नल, संचार और बिजली की व्यवस्था स्वचालित तरीके से काम करेगी।
- इस मार्ग से राज्य की दो राजधानियों जम्मू और श्रीनगर के बीच सफर में ढाई घंटे कम समय लगेगा।
- सड़क मार्ग से चेनानी और नशरी के बीच की दूरी 41 किलोमीटर के बजाए अब 10.9 किलोमीटर रह जाएगी।
- इस सुरंग की सबसे बड़ी बात ये है कि इसमें 120 से ज्यादा सीसीटीवी लगाए गए हैं, जिनमें हर कैमरे की दूरी 75 मीटर है।
- आईटीसीआर चिंताजनक हालात में सुरंग के अंदर मौजूद कर्मचारियों से संपर्क करके समस्या का निदान करेगा। सुरंग में हर 150 मीटर पर एसओएस बॉक्स लगें हैं।
- आपातकालीन स्थिति में यात्री इनका इस्तेमाल हॉट लाइन की तरह कर सकेंगे। -आईटीसीआर से मदद पाने के लिए यात्रियों को एसओएस बॉक्स खोलकर बस “हलो” बोलना होगा।
- एसओएस बॉक्स में फर्स्टएड का सामान और कुछ जरूरी दवाएं भी होंगे।
इसके फायदे
- नेशनल हाईवे-1ए पर रुकेगा ट्रैफिक जाम
- समय और ईंधन की बचत होगी
- शेष भारत से इस राज्य का संपर्क सुगम हो जाएगा
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