लाहौर/वाघा: उरी आतंकी हमले के मामले में करीब 6 माह तक हिरासत में रहे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के 2 युवकों पर से हमले की साजिश के आरोप हटा लेने के बाद शुक्रवार को उन्हें वाघा में उनके परिजन से मिला दिया गया। अपनी जांच के दौरान NIA इस निष्कर्ष पर पहुंची कि फैसल हुसैन अवान और अहसान खुर्शीद पढ़ाई के दबाव को लेकर मां-बाप से मनमुटाव के बाद भाग कर भारतीय सीमा में आ गए थे। इसके बाद 8 मार्च को उनको जम्मू आधारित सेना के 16 कोर को सौंप दिया गया था।
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सीमा सुरक्षा बल ने अवान और खुर्शीद को वाघा सीमा पर पाकिस्तान रेंजर्स को सौंप दिया जहां उनके परिवार के सदस्य उनका स्वागत करने के लिए मौजूद थे। अवान के पिता ने वाघा सीमा पर पत्रकारों से कहा, ‘मैं अपने बेटे को अपने दरम्यान पा कर बेहद खुश हूं। मैं अपने बेटे की सुरक्षित रिहाई पर पाकिस्तान और भारत की सरकारों का शुक्रगुजार हूं।’ उन्होंने कहा कि दोनों बच्चों के भारत में गिरफ्तार होने पर उनके खानदानों को जबरदस्त मानसिक पीड़ा हुई। अवान के पिता ने कहा, ‘बच्चे गलती से कश्मीर में भारत की ओर चले गए थे। दोनों सरकारों को इंसानियत की बुनियाद पर ऐसे मामलों को निपटाने के लिए कोई तंत्र विकसित करना चाहिए।’ अवान के भाई अब्दुल मुस्तफा ने कहा कि उसका भाई अब स्कूल जाएगा और अपनी तालीम जारी रखेगा।
18 सितंबर को अपने शिविर पर हुए हमले के बाद सेना की उरी स्थित इकाई ने दोनों को हिरासत में लिया था और उनसे पूछताछ की थी। हमले में सेना के 19 जवान शहीद हुए थे। NIA ने कहा कि बयान, उनके मोबाइल फोन के तकनीकी विश्लेषण, जब्त GPS उपकरण और उसके द्वारा जुटाए गए अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य से उरी में हमला करने वालों और संदिग्धों के बीच किसी प्रकार का संबंध स्थापित नहीं हो सका। सेना ने हमले के कुछ दिन बाद ही 23 सितंबर को दोनों को हिरासत में लिया था और दावा किया था कि उन्होंने उरी हमले को अंजाम देने वाले हमलावरों के मार्गदर्शक की तरह काम किया।
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