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भाजपा को प्रचंड बहुमत के बाद कठघरे में ईवीएम, क्या छेड़छाड़ है संभव?

नई दिल्ली: हाल ही में पांच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में हार का सामना करने वाले दलों ने ईवीएम को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़

EVMs- India TV Hindi
Image Source : PTI EVMs

नई दिल्ली: हाल ही में पांच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में हार का सामना करने वाले दलों ने ईवीएम को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की गई। बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसे लोकतंत्र की हत्या तक करार दिया और इस बात को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत तक कर दी। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है।

जानें वो बातें जो किसी भी हाल में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ कर पाना संभव नहीं.....

  • ईवीएम को इंटरनेट की सहायता से काम में नहीं लिया जाता है। बिना इंटरनेट के ईवीएम को किसी भी प्रकार से हैक करना संभव नहीं है। जिसके कारण छेड़छाड़ नहीं की जा सकता है।
  • कौन सी ईवीएम मशीन किस पोलिंग बूथ पर रहेगी इस बात का पता पहले से नहीं होता, पोलिंग पार्टी को एक दिन पहले पता चलता है कि उनके पोलिंग बूथ पर कौन से सीरिज़ की ईवीएम आएगी।
  • ईवीएम में दो मशीन होती है, बैलट यूनिट और कंट्रोल यूनिट। वर्तमान में इसमें एक तीसरी यूनिट वीवीपीएटी भी जोड़ दिया गया है, जो सात सेकंड के लिए मतदाता को एक पर्ची दिखाता है जिसमें ये उल्लेखित रहता है कि मतदाता ने अपना वोट किस अभ्यर्थी को दिया है। ऐसे में अभ्यर्थी बूथ पर ही आश्वस्त हो सकता है कि उसका वोट सही पड़ा है कि नहीं।
  • वोटिंग शुरू होने से पहले ही ईवीएम मशीन को टेस्ट किया जाता है कि मशीन ठीक है या नहीं। ये भी देखा जाता है कि इससे किसी तरह की कोई छेड़छाड़ तो नहीं की गई है। इस प्रक्रिया को मॉक पोलिंग भी कहा जाता है। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही वोटिंग शुरू करवाई जाती है।
  • सभी पोलिंग एंजेट से मशीन में वोट डालने को कहा जाता है ताकि ये जांचा जा सके कि सभी उम्मीदवारों के पक्ष में वोट गिर रहा है कि नहीं। ऐसे में यदि किसी मशीन में टेंपरिंग या तकनीकि गड़बड़ी होगी तो मतदान के शुरू होने के पहले ही पकड़ ली जायेगी।
  • मॉक पोल के बाद सभी उम्मीदवारों के पोलिंग एजेंट मतदान केन्द्र की पोलिंग पार्टी के प्रभारी को सही मॉक पोल का सर्टिफिकेट देते है। इस सर्टिफिकेट के मिलने के बाद ही संबंधित मतदान केन्द्र में वोटिंग शुरू की जाती है। ऐसे में जो उम्मीदवार ईवीएम में टैंपरिंग की बात कर रहे हैं वे अपने पोलिंग एंजेट से इस बारे में बात कर आश्वस्त हो सकते है।
  • मतदान शुरू होने के बाद मतदान केन्द्र में मशीन के पास मतदाताओं के अलावा मतदान कर्मियों के जाने की मनाही होती है, वे ईवीएम के पास तभी जा सकते है जब मशीन की बैट्री डाउन या कोई अन्य तकनीकि समस्या होने पर मतदाता द्वारा सूचित किया जाता है।
  • हर मतदान केन्द्र में एक रजिस्टर बनाया जाता है, इस रजिस्टर में मतदान करने वाले मतदाताओं की डिटेल अंकित रहती है और रजिस्टर में जितने मतदाता की डिटेल अंकित होती है, उतने ही मतदाताओं की संख्या ईवीएम में भी होती है। काउंटिंग वाले दिन इनका आपस मे मिलान मतदान केंद्र प्रभारी की रिपोर्ट के आधार पर होता है।
  • ईवीएम में अधिकतम 3840 मत दर्ज किए जा सकते हैं। जैसाकि सामान्य तौर पर होता है, एक मतदान केन्द्र में निर्वाचकों की कुल संख्या 15,00 से अधिक नहीं होगी फिर भी, ईवीएम की क्षमता पर्याप्त से अधिक है। ईवीएम अधिकतम 64 अभ्य‍र्थियों के लिए काम कर सकती है।
  • ईवीएम की प्रोग्रामिंग इस प्रकार की गई है कि मशीनें एक मिनट में केवल पांच मतों को ही दर्ज करेगी। चूंकि मतों का दर्ज किया जाना अनिवार्य रूप से कंट्रोल यूनिट तथा बैलेटिंग यूनिट के माध्यम से ही किया जाना, इसलिए उपद्रवियों की संख्या चाहे कितनी भी हो, वे केवल 5 मत प्रति मिनट की दर से ही मत दर्ज कर सकते हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट में ईवीएम टैंपरिंग से संबंधित जितने भी मामले पहले आये उनमें से किसी भी मामले में ईवीएम में टैंपरिंग सिद्व नहीं हो पाई है। स्वयं चुनाव आयोग आम लोगों को आंमत्रित करता है कि वे लोग आयोग जाकर ईवीएम की तकनीक को गलत सिद्व करने हेतु अपने दावे प्रस्तुत करें। लेकिन आज तक कोई भी दावा सही सिद्व नहीं हुआ है।

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