नयी दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने मानहानि के मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के वकील राम जेठमलानी द्वारा जिरह के दौरान केन्द्रीय मंत्री अरूण जेटली के खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों को आज अपमानजनक करार दिया।
हाईकोर्ट के जज जस्टिस मनमोहन ने कहा कि अगर ऐसी टिप्पणियां केजरीवाल के निर्देश पर की गईं हैं तो उन्हें पहले कठघरे में आना चाहिए और जेटली से जिरह से पहले अपने आरोप लगाने चाहिए। जस्टिस मनमोहन ने कहा, अगर ऐसे आरोप प्रतिवादी संख्या एक (केजरीवाल) के निर्देश पर लगाए गए हैं तो वादी (जेटली) से जिरह जारी रखने का कोई तुक नहीं है। प्रतिवादी एक को आरोप लगाने दीजिए। उन्हें कठघरे में आने दीजिए।
जेटली के वकील राजीव नायर और संदीप सेठी ने अदालत के समक्ष मुद्दे को उठाया और कहा कि वह केजरीवाल की ओर से इस बात का स्पष्टीकरण चाहते हैं कि टिप्पणियां उनके निर्देश पर की गई थीं अथवा जेठमलानी ने अपनी ओर से ही टिप्पणियां की थीं। नायर ने कहा कि अगर केजरीवाल ने वरिष्ठ अधिवक्ता को प्रतिकूल टिप्पणी करने का निर्देश दिया था तो वे उनसे 10 करोड़ रपये की बढ़ी हुई अतिरिक्त क्षतिपूर्ति की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर जेठमलानी ने खुद से टिप्पणी की तो यह बार काउन्सिल ऑफ इंडिया के नियमों का उल्लंघन होगा।
अदालत ने कहा कि इस तरीके से जिरह की अनुमति नहीं दी जा सकती है और कुछ किया जाना चाहिए। पीठ ने जेटली के वकीलों को जेठमलानी द्वारा उनके खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों के संबंध में एक आवेदन दायर करने को कहा। जस्टिस मनमोहन ने कहा, इस तरह के अपमानजनक बयान जब दिये जा रहे हों तो क्या किया जाना चाहिए। यह अप्रिय है। उन्होंने कहा, जिरह कानून के अनुसार होनी चाहिए।
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