Photo Blog: कॉर्न फेस्टिवल से छिंदवाड़ा के मक्का को मिली अंतर्राष्ट्रीय पहचान, स्थापित किया विश्व रिकॉर्ड
मक्का को भारत में ही नहीं पूरी दुनिया की अनेक सभ्यताओं ने अपनाया और अपने खाने का अभिन्न अंग बनाया। कहते हैं कोर्न मेक्सिको से 11वी-12वीं शताब्दी में भारत आया और यहां की जलवायु के साथ ऐसे एक ले हो गया जैसे यहीं की पैदावार हो...

यहां का दृश्य देखने लायक है, पूरा पुलिस ग्राउंड लोगों से खचाखच भरा हुआ है एक तरफ किसान है तो दूसरी तरफ शहरी लोग हैं। एक तरफ आदिवासी हैं तो दूसरी तरफ वैज्ञानिक है। एक तरफ नेता है तो दूसरी तरफ बच्चे हैं। यह पर्व है छिंदवाड़ा जिले के पूरे 200 गांव का। इस उत्सव में लोगों की भागीदारी देखते ही बनती है यहां युवा पूरे उत्साह के साथ उत्सव को सफल बनाने में रात दिन लगाकर मेहनत कर रहे हैं, वहीं छिंदवाड़ा शहर की महिलाएं एक अलग किसम के व्यंजनों के कॉन्टेस्ट में जीतने की होड़ में लगी हुई है इन महिलाओं ने मात्र कॉर्न के प्रयोग से 50 से ज्यादा अधिक स्वादिष्ट डिशेज बनाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
छिंदवाड़ा में फेस्टिवल की तैयारी हर वर्ग में अलग ही रूप में देखने को मिल रही है पूरा जिला इस फेस्टिवल को विश्वव्यापी पहचान दिलाने में जी जान से लगा हुआ है इसकी एक मिसाल यहां देखने को मिली यहां के सांस्कृतिक दीर्घा में जहां पर छिंदवाड़ा के स्कूलों के बच्चों ने कॉर्न को लेकर पेंटिंग्स बनाई हैं और यह पेंटिंग ढाई लाख से अधिक हैं। यह अपने आप में एक कीर्तिमान है जिसका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। स्कूली बच्चों द्वारा बनाई गई यह पेंटिंग्स बहुत सुंदर हैं हर पेंटिंग कॉर्न को एक अलग रूप में स्थापित करते हैं। जहां युवा कॉर्न और कॉर्न के अवयवों से बने चीजों को फैशन के साथ जोड़ कर फैशन ज्वेलरी बना रहे हैं।