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जानें 'ऑपरेशन म्यांमार' की इनसाइड स्टोरी !

नई दिल्ली: 'ऑपरेशन म्यांमार' के तहत भारतीय सेना ने पहली बार किसी देश की सीमा के अंदर घुसकर एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। 5 जून को हुए भारतीय सेना के काफिले पर हमले

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ऐसे हुआ 'ऑपरेशन म्यांमार' !

नई दिल्ली: 'ऑपरेशन म्यांमार' के तहत भारतीय सेना ने पहली बार किसी देश की सीमा के अंदर घुसकर एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। 5 जून को हुए भारतीय सेना के काफिले पर हमले में 18 जवानों को मौत के घाट उतारने वाले उग्रवादियों को भारतीय सेना ने करारा जवाब दिया है। सेना ने सोची-समझी रणनीती के तहत ज़ोरदार प्रहार किया और करीब 50 उग्रवादियों को सीमापार जा कर मार गिराने की ख़बर है। साथ ही इससे ऑपरेशन से सेना ने पड़ोसी देशों को भी सचेत रहने का संकेत दिया है।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बांग्लादेश दौरे से ठीक पहले हुए उग्रवादी हमले को गंभीरता से लेते हुए पूरे ऑपरेशन की कमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोबाल को सौंपी गई। पीएम मोदी की तरफ से बिना किसी ढील के इस ऑपरेशन के लिए हरी झंडी देते ही कार्यवाही शुरू हो गई। पूरे ऑपरेशन के दौरान रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर और आर्मी चीफ दलबीर सिंह सुहाग से संपर्क में रहे।

'ऑपरेशन म्यांमार' की इनसाइड स्टोरी'

म्यांमार बॉर्डर पर इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए भारतीय सेना के 125  पैरा स्पेशल फोर्स के कमांडो की टीम तैयार की गई। इन पैरा कमांडो में असम रायफल्स के भी कमांडो शामिल थे। इस पूरी टीम के सहयोग के लिए भारतीय वायुसेना के 17  एम आई हैलीकॉप्टर और यूएवी की भी तैनाती की गई।

8 घंटे तक चले ऑपरेशन में उग्रवादियों के भागने के सारे रास्ते बंद करने के लिए कुछ स्नाइपर्स की भी तैनाती की गई थी। इस पूरे अभियान में किसी भी कमांडो को कोई खरोंच तक नहीं आई। सेना की रणनीती ये थी कि कम से कम अटैक में ज्यादा से ज्यादा नुकसान करके बेस पर वापस लौट आएं। इस पूरे ऑपरेशन को कंट्रोल करने के लिए लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत निगरानी में लगे बेस को इंफाल में बनाया गया था। सेना के पास उग्रवादियों के कैंप और मैप की खुफिया जानकारी थी। सेना की टीम पूरी तैयारी कर के अपने साथ गोला-बारूद भी लेकर गई थी। साथ ही, इस ऑपरेशन में एक दूसरी टीम को स्टैंडबाई पर भी रखा गया था।

मेजर जनरल रणवीर सिंह, एडिशनल डायरेक्टर जनरल, मिलिट्री ऑपरेशंस ने बताया कि, "कुछ दिनों में हमें काफी विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिली। इनके जरिए पता चला कि हमारे इलाके में उग्रवादी र हमलों की तैयारी कर रहे थे। ये हमले कुछ ऐसे उग्रवादी समूहों ने किए थे, जो सुरक्षा बलों पर इससे पहले हुए अटैक में भी शामिल रहे थे। इस खतरे को देखते हुए जरूरी था कि इन उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। खुफिया जानकारी के आधार पर हमने इन हमलों का जवाब देने की तैयारी की।"

मेजर जनरल सिंह ने कहा कि उग्रवादियों के हमले के बाद पूरे इलाके में हाई एलर्ट किया गया था और इसी बीच सेना को विश्वसनीय और सटीक जानकारी मिली कि भारतीय सीमा में कुछ और हमलों की साजिश रची जा रही है। इन में भी मणिपुर हमले में शामिल गुटों और उसके सहयोगियों के शामिल होने की आशंका जतायी गई थी।

उन्होंने कहा कि खुफिया जानकारी की पुष्टि होने के बाद सेना ने इन हमलों को विफल करने के लिए इसकी साजिश रच रहे उग्रवादियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की योजना बनाई। मेजर जनरल ने कहा कि सेना ने म्यांमार सेना को विश्वास में लेकर सुबह नागालैंड और मणिपुर से लगे भारत-म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों में दो जगह अलग अलग उग्रवादी गुटों के सदस्यों को निशाना बनाया।
 
उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में उग्रवादी मारे गए हैं। इस तरह से सेना ने सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय लोगों पर होने वाले एक बड़े हमले को टाल दिया। मेजर जनरल सिंह ने कहा, ‘म्यांमार और भारत की सेनाओं के बीच सहयोग की ऐतिहासिक परंपरा रही है। हम म्यांमार की सीमा सेना के साथ इस तरह की आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ मिलकर काम करने की अपेक्षा करते हैं।’

उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्यों में शांति और सुरक्षा कायम रखने के साथ साथ सेना राष्ट्रीय अखंडता और सुरक्षा के खिलाफ किसी भी प्रकार के खतरे का भविष्य में भी करारा जवाब देगी। पैरा कमांडो का ये ऑपरेशन नगालैंड के तुएनसांग जिले के उखरूल जिले से लगी म्यांमार की सीमा पर हुआ।

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