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बाबरी केस: लालकृष्ण आडवाणी समेत 12 नेताओं को मिली जमानत

छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद गिराने की साजिश में संलिप्तता को लेकर अदालत में चल रहे मामले की सुनवाई में व्यक्तिगत तौर पर पेशी से छूट मांगने के लिए भाजपा नेताओं ने अदालत का रुख किया था।

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Image Source : PTI Advani-Joshi

नई दिल्ली: सीबीआई की विशेष अदालत ने मंगलवार को बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता-लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और अन्य दस लोगों को जमानत दे दी। गौरतलब है कि अदालत अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाए जाने से जुड़े दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने 19 अप्रैल को निर्देश में कहा था कि आडवाणी (89), जोशी (83) और उमा (58) के अलावा बाकी सभी आरोपियों पर बाबरी ढांचा ढहाए जाने के मामले में आपराधिक षड्यंत्र का मुकदमा चलेगा। न्यायालय ने मामले की सुनवाई रोजाना कराने और दो साल में सुनवाई समाप्त करने का निर्देश दिया है। ये भी पढ़ें: इस ब्लड ग्रुप के लोग हैं एलियंस, कहीं आप भी तो उनमें से एक नहीं

अदालत अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाये जाने से जुडे़ दो अलग अलग मामलों की सुनवाई कर रही है। महंत नृत्य गोपाल दास, महंत राम विलास वेदान्ती, बैकुण्ठ लाल शर्मा उर्फ प्रेमजी, चंपत राय बंसल, महंत धर्म दास एवं सतीश प्रधान को भी एक मामले में कल ही तलब किया गया है। छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद गिराने की साजिश में संलिप्तता को लेकर अदालत में चल रहे मामले की सुनवाई में व्यक्तिगत तौर पर पेशी से छूट मांगने के लिए भाजपा नेताओं ने अदालत का रुख किया था।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत ने साल 2001 में तीनों नेताओं को बाबरी मामले में साजिश रचने के आरोपों से बरी कर दिया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने साल 2010 में मामले की सुनवाई के दौरान आरोपों को बरकरार रखा। इस साल अप्रैल में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि भाजपा, शिवसेना तथा विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेताओं को बाबरी मस्जिद को गिराने की साजिश में कथित संलिप्तता के लिए मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। सीबीआई ने भी आरोपों को बरकरार रखने पर जोर दिया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने लखनऊ की विशेष अदालत को मामले की रोजाना स्तर पर सुनवाई करने, एक महीने के भीतर ताजा आरोप तय करने तथा दो साल के भीतर मामले का निपटारा करने को कहा था। इस सप्ताह की शुरुआत में पांच आरोपियों ने अदालत के समक्ष समर्पण कर दिया, जबकि शिवसेना के नेता ने बुधवार को समर्पण किया, जिसके बाद सभी को जमानत दे दी गई।

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