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केवल 'खवैयों' का नहीं, 'साफ रवैये' वालों का भी शहर है इंदौर: सुमित्रा महाजन

इंदौर को देश का सबसे साफ शहर चुने जाने का श्रेय शहर के लिये इंदौरवासियों के प्यार को देते हुए लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आज कहा कि इससे साबित हो गया है कि इंदौर सिर्फ खवैयों का ही नहीं बल्कि साफ रवैये वालों का भी शहर है।

sumitra mahajan- India TV Hindi
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नई दिल्ली: इंदौर को देश का सबसे साफ शहर चुने जाने का श्रेय शहर के लिये इंदौरवासियों के प्यार को देते हुए लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आज कहा कि इससे साबित हो गया है कि इंदौर सिर्फ खवैयों का ही नहीं बल्कि साफ रवैये वालों का भी शहर है।

केंद्र सरकार द्वारा आज जारी स्वच्छ सर्वेक्षण 2017 में इंदौर को भारत का सबसे साफ शहर चुना गया जबकि भोपाल दूसरे स्थान पर रहा। इंदौर से आठ बार की सांसद और स्थानीय लोगों में ताई के रूप में लोकप्रिय महाजन ने भाषा को दिये इंटरव्यू में कहा, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। इसका पूरा श्रेय इंदौर के लोगों को जाता है जो अच्छे काम के लिये हमेशा सहयोग करते हैं। मैं हमेशा से यह कहती आई हूं। उनके सहयोग से ही सफलता मिली है।

उन्होंने कहा कि इससे लोगों की यह धारणा भी टूटेगी कि इंदौर सिर्फ पोहा जलेबी या खान पान के लिये मशहूर है। उन्होंने कहा, इंदौर सिर्फ खवैयों (खाने पीने के शौकीन लोगों) का ही नहीं बल्कि साफ रवैये वालों का भी शहर है। इंदौर के लोग सिर्फ खाते नहीं बल्कि सफाई भी रखते हैं। प्रशासन कोई अच्छी पहल करता है तो उसका सहयोग करते हैं और यही साफ रवैया है।

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उन्होंने कहा, हमने इंदौर को साफ सुथरा बनाने की शुरूआत नगर निगम से बरसों पहले की और फिर महानगर विकास केंद्र परिषद के जरिये एक प्रकार का जन आंदोलन चलाया। अलग-अलग तरीके अपनाए। मसलन यह तय किया कि दीपावली या त्यौहारों से पहले मंदिरों की सफाई करेंगे और फिर उसमें प्रवेश करेंगे। एक-एक चीज होती गई। घर घर से कचरा उठवाना बड़ी चुनौती थी लेकिन उसे कबूल किया और लोगों ने साथ दिया।

महाजन ने कहा, इसमें इंदौर के लोगों का सहयोग काबिले तारीफ है। मैं सांसद निधि से सहयोग कर सकती हूं लेकिन लोगों की भागीदारी के बिना कोई आंदोलन कामयाब नहीं हो सकता। मुझे अच्छा लगता कि इंदौर की जनता पूरे दिल से अच्छे काम में सहयोग देती है। इंदौर के लिये इंदौरियों के मन में जो अपनापन है, यह उपलब्धि उसी का नतीजा है।

देश विदेश घूम चुकी लोकसभा स्पीकर ने कहा कि उन्हें हमेशा से लगता था कि इंदौर कई शहरों के मुकाबले काफी साफ है और अब इस पर मुहर भी लग गई। उन्होंने कहा, मैं बाकी शहरों में जाती हूं तो बोलती हूं कि मेरा इंदौर इससे बहुत साफ है। अब तो मुहर भी लग गई। दूसरें शहरों में लोग स्थानीय प्रशासन के जिम्मे काम डालते हैं। हमारे यहां भी पहले ऐसा ही था लेकिन फिर जनता से सहयोग मांगा जो जनता ने दिया। यह सबसे अलग बात है इंदौर की।

उन्होंने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वच्छ भारत अभियान को भी दिया। उन्होंने कहा, देश के नेता के व्यक्तित्व का भी असर लोगों पर पड़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी के कारण भी काफी जागृति आई है। अभी कुछ दिन पहले मेरी किताब का विमोचन था और उस दौरान विमोचन से ज्यादा जो वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हुआ, वह यह था कि प्रधानमंत्री ने सारा कागज समेटकर अपनी जेब में डाला।

1989 से लोकसभा में इंदौर की नुमाइंदगी कर रही सांसद ने कहा कि इंदौर की संस्कृति में अपनापन टूटा नहीं है और आने वाले समय में शहर काफी तरक्की करेगा। उन्होंने कहा , मैं शुरू ही से अभी तक मैं देखती आई हूं कि इंदौर की संस्कृति में अपनापन टूटा नहीं है। कभी-कभी हमें डर लगता था कि इंदौर इतना बढ रहा है, बाहर के लोग आ रहे हैं। इंदौर की अपनी संस्कृति तो नहीं टूट जायेगी। लेकिन सांस्कृतिक और सामाजिक तौर पर लोग काफी सक्रिय और वैचारिक ऊंचाई भी बढती गई है। कभी-कभी बदलाव आता है लेकिन इंदौर अपने आपको संवार लेता है।

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