A
  1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. पहले मांझी अब रामुलु, आखिर कब तक ऐम्बुलेंस को तरसेंगे गरीब?

पहले मांझी अब रामुलु, आखिर कब तक ऐम्बुलेंस को तरसेंगे गरीब?

ओडिशा के दाना मांझी को तो आप भूले नहीं होंगे? जी हां, वही दाना मांझी जिन्हें अस्पताल ने ऐम्बुलेंस देने से इनकार किया तो वह अपनी पत्नी की लाश को कंधे पर उठाकर ही चल पड़े।

Dana Manjhi and Ramulu- India TV Hindi
Dana Manjhi and Ramulu

हैदराबाद: ओडिशा के दाना मांझी को तो आप भूले नहीं होंगे? जी हां, वही दाना मांझी जिन्हें अस्पताल ने ऐम्बुलेंस देने से इनकार किया तो वह अपनी पत्नी की लाश को कंधे पर उठाकर ही चल पड़े। उनकी पूरी कहानी को आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं। अब कुछ ऐसा ही किस्सा हैदराबाद में भी हुआ है। रामुलु नाम के लेप्रसी से पीड़ित व्यक्ति को अपनी पत्नी की लाश को हाथगाड़ी पर 80 किलोमीटर तक ले जाना पड़ा।

देश-दुनिया की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

53 साल के रामुलु एकेड लेप्रसी से पीड़ित हैं और हैदराबाद के मंदिरों में भीख मांगकर अपना और अपनी पत्नी की जिंदगी का पहिया खींच रहे थे। रामुलु की पत्नी कविता भी लेप्रसी से पीड़ित थीं। बीते शुक्रवार को शहर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी पत्नी की मौत हो गई। रामुलु ने अपनी पत्नी की लाश को अपने पैतृक गांव माइकोड तक ले जाने के लिए ऐम्बुलेंस की मांग की। अस्पताल ने ऐम्बुलेंस के लिए रामुलु से 5 हजार रुपये मांगे। रामुलु के पास इतने पैसे नहीं थे।

पढ़ें: पत्नी का शव को लेकर घंटों सड़क पर भटकता रहा दिल्ली का ‘दाना मांझी’

मजबूर होकर रामुलु ने अपनी पत्नी की लाश को एक गत्ते पर लिटा दिया और हाथगाड़ी के सहारे उन्हें लेकर पैदल ही अपनी यात्रा शुरू कर दी। चलते-चलते उन्होंने 80 किमी तक की दूरी तय भी कर ली, लेकिन विकाराबाद नाम की जगह तक जाते-जाते उनकी हिम्मत जवाब दे गई। वह पत्नी की लाश को वहीं छोड़कर उसके बगल में बैठ रोने लगे। कुछ लोगों की नजर जब रोते हुए रामुलु पर पड़ी तो उन्होंने पुलिस और स्थानीय विधायक को जानकारी दी जिनकी मदद से रामुलु की पत्नी की लाश उनके गांव पहुंच पाई।

खबरों के मुताबिक, रामुलु को हाल ही में पता चला था कि हैदराबाद का एक एनजीओ गरीबों को मुफ्त में 5 किलो चावल देता है। वह और उनकी पत्नी उसी की आस में हैदराबाद शिफ्ट हुए थे। लेकिन कविता का ठीक उसी दिन निधन हो गया, जिस दिन उनका एनजीओ में रजिस्ट्रेशन होना था। लेकिन सवाल उठता है कि आखिर कब तक समाज के आखिरी व्यक्ति तक ऐम्बुलेंस जैसी बेसिक चीज की पहुंच होगी। जो घटनाएं मीडिया में आ जाती हैं उनका तो पता चलता है, पर उन घटनाओं का क्या जिनके बारे में कभी पता ही नहीं चल पाता। यह सिर्फ सरकार की कमी नहीं है बल्कि एक समाज के तौर पर भी हमें इस तरह की घटनाओं पर शर्मिंदा होना चाहिए।

Latest India News