नई दिल्ली: नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा जापान के 5 दिन के दौरे पर जा रहे हैं और इस दौरान वह हाल के वर्षों में परमाणु उर्जा एवं सैना के मोर्चों पर भारत के करीबी सहयोगी बनकर उभरे इस देश के साथ सहयोग के नये रास्ते खोजेंगे। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत, जापान और अमेरिका मालाबार युद्धाभ्यास के अगले सत्र की तैयारियों में जुटे हैं। हिन्द महासागर में चीन की पनडुब्बियों के बढते प्रभाव के बीच इस युद्धाभ्यास में पनडुब्बियों को निशाना बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
नौसेना द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि इस यात्रा का उद्देश्य वर्तमान समुद्री सहयोग पहलों को मजबूत करना तथा नये रास्ते खोजना है। इसमें कहा गया कि भारत और जापान लंबे तट, विस्तृत विशेष आर्थिक क्षेत्र, तटीय सुरक्षा, बड़ा तटीय पोत एवं मछली पकड़ने का बेड़ा जैसी समान समुद्री चुनौतियां साझा करेंगे जिसमें दोनों नौसेनाओं के पास एक दूसरे के अनुभव से सीखने के अवसर हैं।
इसके अलावा नौसेनाओं के लिए कई अन्य मुद्दों पर सहयोग के लिए समान आधार मौजूद हैं। भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग मजबूत है और यह मूल रूप से समुद्री सहयोग पर केन्दि्रत है। द्विपक्षीय रक्षा सहयोग ने वर्ष 2001 में शुरू भारत जापान विस्तृत सुरक्षा वार्ता की शुरूआत के साथ संस्थागत रूप लिया।
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