काठमांडू: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को कहा कि उनकी तीन दिवसीय नेपाल यात्रा सफल रही है। उन्होंने कहा कि यात्रा इस बात को दर्शाती है कि भारत, नेपाल के साथ अपने विशिष्ट रिश्ते को और मजबूत करने को कितना महत्व देता है।
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अपनी यात्रा के समापन के मौके पर राष्ट्रपति मुखर्जी ने एक बयान में कहा, "हमारी तकदीरें एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और दोनों देश इस बात को मान्यता देते हैं कि साझा समृद्धि को बढ़ाने की जरूरत है।" भारतीय राष्ट्रपति का काठमांडू के बाद जनकपुर और पोखरा में भी शानदार स्वागत किया गया।
उन्हें बिदा करने नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी हवाईअड्डे तक आईं। वह मुखर्जी की अगवानी करने भी हवाईअड्डे पहुंची थीं। इससे पता चलता है कि नेपाल ने भारतीय राष्ट्रपति की यात्रा को कितनी अहमियत दी। मुखर्जी ने कहा कि नेपाल के साथ विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भागीदारी को भारत में बहुत ज्यादा महत्व दिया जाता है। एक घनिष्ठ और मित्रतापूर्ण पड़ोसी के रूप में भारत की हमेशा यही इच्छा रही है कि नेपाल में शांति, स्थायित्व और संपन्नता हो।
दोनों देशों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि इस समय जारी द्विपक्षीय विकास और संपर्क परियोजनाओं तथा अप्रैल 2015 के भूकंप के बाद नेपाल के पुनर्निर्माण की परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाए।मुखर्जी को काठमांडू विश्वविद्यालय की मानद डी लिट उपाधि दी गई। काठमांडू और जनकपुर में उनका नागरिक अभिनंदन किया गया और दोनों शहरों की चाबी उन्हें सौंपी गई।
राष्ट्रपति भंडारी, प्रधानमंत्री पुष्प कुमार दहाल और अन्य राजनीतिक नेताओं से मुलाकात में राष्ट्रपति मुखर्जी ने कहा कि भारत, नेपाल के साथ सभी क्षेत्रों में सहयोग को प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध है।
काठमांडू विश्वविद्यालय में उपाधि लेने के बाद राष्ट्रपति ने कहा कि साल 2017 से नेपाली विद्यार्थियों को नियमित रूप से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में अध्ययन का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए संस्थान की दाखिला परीक्षाओं में नेपाली विद्यार्थियों को बैठने की अनुमति दी जाएगी।
राष्ट्रपति मुखर्जी शुक्रवार को दक्षिण नेपाल के शहर, जनकपुर गए और पवित्र राम-जानकी मंदिर में पूजा अर्चना की। उन्होंने जनकपुर नगरपालिका द्वारा आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में भी भाग लिया।
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