नई दिल्ली: देश में एक जुलाई से ऐतिहासिक गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) का रास्ता साफ करते हुए राज्य सभा ने गुरुवार को चार विधेयकों को बिना किसी संशोधन के अपनी मंजूरी दे दी। सेंट्रल जीएसटी बिल 2017, केंद्र शासित प्रदेश जीएसटी बिल 2017, एकीकृत जीएसी बिल 2017 और जीएसटी (राज्यों को मुआवजा) विधेयक 2017 को राज्य सभा ने चर्चा के बाद लोक सभा को वापस लौटा दिए। केंद्र सरकार के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री व अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने इस कदम ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक सुधार की दिशा में ये एक बेहतरीन कदम है।
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लोक सभा ने इन विधेयकों को 29 मार्च को पारित कर दिया था। अब सभी राज्यों को स्टेट जीएसटी विधेयक अपनी-अपनी विधानसभाओं में पारित कराना होगा इसके बाद ही नया जीएसटी कानून लागू किया जा सकेगा।
आठ घंटे चली लंबी परिचर्चा के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जवाब देते हुए यह स्पष्ट किया कि जीएसटी लागू होने से मुद्रास्फीति नहीं बढ़ेगी, जैसा कि कुछ वर्गों द्वारा आशंका जताई जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे पूरे देश में एक समान टैक्स व्यवस्था की शुरुआत होगी।
जीएसटी रेट पर 18-19 मई को जीएसटी काउंसिल चर्चा करेगी। जेटली ने कहा कि एक बार नई व्यवस्था लागे हो जाए उसके बाद विभिन्न विभागों द्वारा कारोबारियों को परेशान करने की समस्या स्वत: ही समाप्त हो जाएगी। पूरे देश में एक वस्तु या सेवा के लिए एक जैसा टैक्स होगा।
केंद्र और राज्यों की भागीदारी से बनी शक्तिशाली जीएसटी काउंसिल ने चार स्तरीय टैक्स ढांचा का सुझाव दिया है, जो 5,12, 18 और 28 प्रतिशत है। सबसे ऊंचे कर स्तर पर लग्जरी और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों पर उपकर लगाने का भी प्रस्ताव है। इससे जीएसटी लागू होने से राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई पहले पांच साल के लिए करने के लिए राशि जुटाई जाएगी।
जेटली ने कहा कि सभी सरकारों के सहयोग से जीएसटी लागू होने जा रहा है और कोई एक व्यक्ति इसका क्रेडिट नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि यह विधेयक सभी की संयुक्त संपत्ति है। उन्होंने कहा कि जीएसटी के लागू होने से केंद्र, राज्यों, उद्योग और व्यापार सभी को फायदा होगा।
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