PM की उज्ज्वला योजना से खुश कश्मीरी महिला ने कहा- 'रमजान के पवित्र महीने में दुआ करूंगी कि नरेन्द्र मोदी की जीत हो'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज उज्ज्वला योजना की लाभार्थी महिलाओं से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बातचीत की...

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज उज्ज्वला योजना की लाभार्थी महिलाओं से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बातचीत की। इस दौरान पीएम मोदी की उज्जवला योजना से खुश होकर एक कश्मीरी महिला ने कहा कि रमजान के पवित्र महीने में दुआ करूंगी कि आगे नरेन्द्र मोदी की जीत हो। अर्जुमाना ने कहा कि पहले उन्हें धुएं में खाना पकाना पड़ता था जिसकी वजह से उन्हें रमजान में दिक्कत होती थी लेकिन उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर मिलने के बाद से उनकी परेशानियां कम हो गई हैं और अब रमजान में खाना पकाने में उन्हें आसानी होती है।
लाभार्थी महिलाओं से बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि पिछले चार साल में 10 करोड़ एलपीजी कनेक्शन बांटे गए। इनमें चार करोड़ कनेक्शन गरीब महिलाओं को मुफ्त में दिए गए। जबकि आजादी के बाद के छह दशकों में मात्र 13 करोड़ कनेक्शन ही बांटे गए। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की लाभार्थी महिलाओं से वीडियो कॉन्फ्रेंस में बातचीत के दौरान मोदी ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने महिलाओं और बच्चों को रसोई के धुंए से बचाने के प्रयास तेज किए हैं। इस दौरान अपने बचपन की यादों को साझा करते हुए मोदी ने कहा कि उन्होंने भी अपनी मां को रसोई में चूल्हे में लकड़ी और गोबर के उपलों से उठने वाले धुंए के साथ संघर्ष करते देखा है। उन्होंने कहा कि आने वाले भविष्य में वह स्वच्छ ईंधन को 100% घरों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
मोदी ने कहा, ‘‘वर्ष 2014 तक केवल 13 करोड़ एलपीजी कनेक्शन बांटे गए थे। यह भी अधिकतर अमीर या सक्षम लोगों को दिए गए। पिछले चार साल में हमने 10 करोड़ नए एलपीजी (रसोई गैस) कनेक्शन बांटे हैं। वह भी अधिकतर गरीब लोगों को। ‘उज्ज्वला योजना’ ने गरीब, हाशिए पर रहने को मजबूर, दलित और आदिवासी समुदाय को मजबूती प्रदान की है। सामाजिक सशक्तिकरण में इस पहल की केंद्रीय भूमिका है।’’
गौरतलब है कि मई 2016 में शुरु की गई उज्ज्वला योजना का लक्ष्य अगले तीन सालों में पांच करोड़ लोगों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देना है। विशेषकर ऐसी महिलाओं या परिवारों को जो बेहद गरीब हैं। इसका मकसद लकड़ी और गोबर के उपलों जैसे प्रदूषणकारी ईंधन के उपयोग को कम करना हैं विश्व स्वास्थ्य संगठन की रपट के अनुसार भारत में हर साल 13 लाख असमय मौत इसकी वजह से होती हैं। इस साल इस लक्ष्य को संशोधित कर आठ करोड़ कर दिया गया और वक्त को भी दो साल और बढ़ा दिया गया।