जयपुर: एक राजनेता, प्रधानमंत्री और एक दोस्त के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी का राजस्थान से हमेशा नजदीकी रिश्ता रहा। वह पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत हों, पोकरण या शिवकुमार किसी न किसी बहाने वाजपेयी की डोर राजस्थान से बंधी रही। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित अखिल आयुर्विज्ञान संस्थान में आज निधन हो गया।
जनसंघ की पहली पीढ़ी के तीन प्रमुख नेताओं में से एक भैंरोसिंह शेखावत से वाजपेयी की दोस्ती किसी से छुपी नहीं थी। शेखावत की बेटी की शादी में उन्होंने जयपुर में परिवार के प्रमुख सदस्य के रूप में सारे रस्मों रिवाज निभाए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने शादी नहीं की थी, लेकिन उनके अजीज मित्र और पूर्व उपराष्ट्रपति भैंरो सिंह शेखावत ने उन्हेंं बेटी के पिता होने का सौभाग्य दिया था। शेखावत जब उपराष्ट्रपति बने तो वाजपेयी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा था कि 'मिट्टी की धूल माथे पर चंदन का तिलक बनकर उभरी है।'
lal krishna advani, atal bihari vajpayee and bhairon singh shekhawat
उन्होंने अपने अन्य मित्रों की सूची में जिन लोगों को शामिल किया था उनमें शेखावत के अलावा राजस्थान के ही जसवंत सिंह भी रहे। वाजपेयी के बससे करीबी लोगों में शिवकुमार पारीक को कैसे भूला जा सकता है। जयपुर के रहने वाले शिवकुमार 1957 में एक सहयोगी व बॉडीगार्ड के रूप में वापजेयी के साथ जुड़े। वह दशकों तक निजी सहायक ही नहीं बल्कि उनके पारिवारिक सदस्य के रूप में वाजपेयी के हर राजनीतिक उतार-चढ़ाव के साक्षी भी रहे।