कोरोना संकट की शुरुआत से लोगों को संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सबसे जरूरी माना गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दो गज़ की दूरी बहुत है जरूरी नारा दिया। जो कि कोरोना से लड़ाई का सबसे बड़ा हथियार माना गया। लेकिन अब जहां दुनिया अनलॉक हो रही है, आर्थिक गतिविधियां दोबारा चालू हो रही हैं। ऐसे में क्या यह दो गज़ की दूरी का फॉर्मूला हर जगह कारगर है? क्या बंद कमरे, बंद कार, किसी संकरी जगह पर भी यह फॉर्मूला काम कर सकता है?
दक्षिण कोरिया में हुई एक ताजा स्टडी में सामने आया है कि बंद कमरे में हवा के माध्यम से कोरोना फैलने का खतरा अभी भी बना हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मंदिरों, स्कलों, रेस्टोरेंट और बाजारों में कोरोना के संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए उस स्थान को हवादार बनाना बेहद जरूरी है। बंद हवा के चलते कोरोना का संक्रमण ज्यादा होता है।
जर्नल आॅफ कोरियन मेडिकल साइंसेस में छपी स्टडी के अनुसार किसी बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमित व्यक्ति से मात्र 5 मिनट के भीतर कोरोना का संक्रमण पहुंच सकता है। जहां विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि 6 फीट की दूरी कोरोना का संक्रमण रोकने में कारगर है। वहीं इस स्टडी में सामने आया कि बंद कमरे में 20 फीट की दूरी पर बैठे एक संक्रमित शख्स से दूसरा शख्स संक्रमित हो गया।
इससे पहले अमेरिकन सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन द्वारा अक्टूबर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार कुछ परिस्थितियों में 6 फीट से अधिक दूरी पर बैठे लोग भी छोटी ड्रॉपलेट और कड़ों के संपर्क में आकर संक्रमित हो सकते हैं।
मास्क अभी भी सबसे उचित उपाय
रिसर्चर का मानना है कि अभी भी मास्क पहनना और लगातार हाथ को धोते रहना कारोना से बचाव का सबसे उचित और कारगर तरीका है। मास्क पहनने से ड्रॉपलेट बाहर जा नहीं पाते हैं। इसके चलते कोरोना से मास्क पहनकर बचा जा सकता है।
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