केंद्र का रुख तटस्थ
संविधान पीठ के समक्ष केन्द्र सरकार ने कहा था कि वह 2004 के अपने रूख पर कायम है कि संबंधित राज्यों को इस विवाद को आपस में ही सुलझाना चाहिए। केन्द्र सरकार ने कहा था कि वह तटस्थ रूख अपनाते हुये इस विवाद में किसी का भी पक्ष नहीं ले रही है। इस मामले में न्यायालय ने राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और जम्मू कश्मीर राज्यों की दलीलों को दर्ज किया था।
हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की
सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली जिस पर शीर्ष अदालत ने यथास्थिति बनाये रखने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने फैसला आने तक केन्द्रीय गृह सचिव और पंजाब के मुख्य सचिव तथा पुलिस महानिदेशक को सतलुज यमुना संपर्क नहर से संबंधित भूमि और अन्य संपत्ति का संयुक्त संरक्षक नियुक्त किया था।
न्यायाधिकरण का गठन होना चाहिए: बादल
पंजाब की प्रकाश सिंह बादल सरकार ने दलील दी थी कि अन्य राज्यों के साथ इस विवाद को हल करने के लिये नया न्यायाधिकरण गठित करना चाहिए जिसमें जल के घटते प्रवाह और तटीय अधिकारों सहित सभी पहलुओं को भी शामिल किया जाना चाहिए। पंजाब सरकार का कहना था कि जल का घटता प्रवाह और अन्य बदली परिस्थितियों में इस जल बंटवारे के मामले में उसने 1981 के लोंगोवाल समझौते की समीक्षा के लिये 2003 में ही न्यायाधिकरण गठित करने का अनुरोध किया था। दूसरी ओर, हरियाणा की मांग पर पंजाब का कहना था कि 1966 में नये राज्य के सृजन के बाद उसकी स्थिति यमुना नदी के किनारे स्थित राज्य की हो गयी थी।
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