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ट्रेन धमाके के आरोपियों ने ऑनलाइन सीखा बम बनाने का तरीका: पुलिस

भोपाल: भोपाल-उज्जैन सवारी गाड़ी में हुए धमाके के मामले में गिरफ्तार किये तीन युवक आतंकवादी संगठन आईएसआईएस की विचारधारा से प्रभावित थे और उन्होंने बम बनाने का तरीका एक उग्रवादी संगठन की ऑनलाइन मैग्जीन इंस्पायर

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भोपाल: भोपाल-उज्जैन सवारी गाड़ी में हुए धमाके के मामले में गिरफ्तार किये तीन युवक आतंकवादी संगठन आईएसआईएस की विचारधारा से प्रभावित थे और उन्होंने बम बनाने का तरीका एक उग्रवादी संगठन की ऑनलाइन मैग्जीन इंस्पायर से सीखी थी।

मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक खुफिया मकरंद देउस्कर ने आज यहां संवाददाताओं को बताया, गिरफ्तार किये गये इन युवकों ने पूछताछ के दौरान बताया कि वे आईएसआईएस की विचारधारा से प्रभावित हैं और बम बनाने का तरीका ऑनलाइन मैग्जीन इंस्पायर से सीखा था। इसके अलावा, वे इंटरनेट पर आईएसआईएस का साहित्य भी पढ़ते थे। उन्होंने कहा, इससे साबित होता है कि वे आईएसआईएस की विचारधारा से प्रभावित थे और उग्रवादी थे।

जब उनसे सवाल किया गया कि उत्तरप्रदेश के पुलिस अधिकारी ने लखनऊ में मारे गये सैफुल्ला के बारे में दावा किया है कि वह आईएसआईएस से प्रभावित नहीं था, क्योंकि उसके पास कोई ठोस सबूत नहीं मिले, इसपर देउस्कर ने बताया कि वह इस पर टिप्पणी नहीं करेंगे। यह उत्तरप्रदेश पुलिस का मामला है। लेकिन, जहां तक मध्यप्रदेश में गिरफ्तार किये गये इन तीन आरोपियों की बात है, जांच के अनुसार ये तीनों आरोपी निश्चित रूप से आईएसआईएस से प्रभावित हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि गिरफ्तार किये गये इन युवकों के खिलाफ गैर कानूनी गतिविधि निरोधक कानून (यूएपीए) से सम्बद्ध और धाराएं भी लगाई गई हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) इस मामले की जांच अपने हाथ में लेगी, तो देउस्कर ने कहा, जब भी इस संबंध में आदेश आएगा, हम आपको (मीडिया) जानकारी देगें, लेकिन वर्तमान में मप्र की एटीएस इसकी जांच कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि केन्द्रीय जांच एजेंसी सहित विभिन्न राज्यों की पुलिस भोपाल पहुंच गई है और वह गिरफ्तार किये गये इन आरोपियों से निरंतर पूछताछ कर रही हैं, ताकि मामले की जड़ तक पहुंचा जा सके। जब मकरंद देउस्कर से सवाल किया गया कि गिरफ्तार किये गये युवकों ने सीरिया में अपने हैंडलर्स को धमाके की तस्वीरें भेजी थीं, पुलिस महानिदेशक ने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ में यह दावा किया है कि उन्होंने अपने हैंडलर्स को फोटो भेजे हैं, लेकिन इसकी पुष्टि आईपी ऐड्रेस का सत्यापन हो जाने और इससे जुड़े हुए ब्योरे की जांच के बाद ही होगी।

उन्होंने कहा, यह लंबी जांच का विषय है और सामान्य तौर पर ऐसे मामलों में हैंडलर्स द्वारा उन्हें अपना सही पता नहीं बताया जाता कि वह किस स्थान से उन्हें हैंडल कर रहे हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं कि गिरफ्तार किये गये इन तीन आरोपियों को अंतरराष्ट्रीय फंडिंग मिल रही थी। उन्होंने कहा, आरोपियों के बैंक खातों की जांच करने के बाद ही इस बारे में पता लगेगा।

देउस्कर ने बताया कि उनके द्वारा विस्फोट किया गया बम पाइप बम था और घटनास्थल पर मिले अवशेष जीआई पाइप पर आईएसआईएस नाउ इन इंडिया लिखा हुआ था। उन्होंने कहा कि यह एक लो इंटेन्सिटी का बम था और आरोपियों को भी इसका अंदाजा नहीं था कि उनके द्वारा किया जा रहा धमाका लो इंटेन्सिटी का है।

आईजी ने बताया कि गिरफ्तारी के वक्त उनके पास से जो सामान बरामद हुआ है उसमें कोई हथियार नहीं था। तीनों युवकों को होशंगाबाद जिले के पिपरिया से सात मार्च को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले उन्होंने भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन के जनरल कोच में बम रखा था, जिसमें धमाका होने से 10 रेल यात्री घायल हो गये थे।

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