नई दिल्ली: बात चाहे काले धन से निपटने के लिए नोटबंदी की हो, या फिर नवोन्मेष की हो, अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी काबिलियत दिखाने की हो या फिर स्वास्थ्य के क्षेत्र में असंभव लगने वाली उपलब्धि हासिल करने की हो, भारत ने पूरे दमखम के साथ अपनी मेधा दिखाई और दुनिया के सामने साबित कर दिया कि वह विषमताओं से जूझते हुए खुद को खरा साबित करने का माद्दा रखता है।
एक अरब से अधिक की आबादी वाले इस देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर की रात को अचानक राष्ट्र के नाम संबोधन में काले धन और भ्रष्टाचार की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए 500 रूपये और 1000 रूपये के नोट अमान्य करने का ऐलान किया। दुनिया के कई देशों में मोदी के इस हौसले और फैसले की सराहना की।
कभी अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका से GPS (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) के लिए मदद मांगने वाले भारत ने अपनी मेक इन इंडिया पहल के तहत अपना देसी जीपीएस तैयार कर दुनिया को दिखा दिया कि हम किसी से कम नहीं हैं।
आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से 29 अप्रैल को प्रक्षेपित किए गए उपग्रह IRNSS-1जी के सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित हो जाने के साथ ही भारत अमेरिका, रूस, चीन और यूरोप के बाद विश्व का ऐसा पांचवा देश बन गया, जिसके पास अपनी जीपीएस प्रणाली है।
अंतरिक्ष में अपनी सफलता की सुनहरी गाथा लिखने वाला भारत अब अपने आसपास 1500 किलोमीटर के दायरे में आने वाले अन्य देशों को भी इसकी सेवा का लाभ दे सकता है।
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