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Hindi News भारत राष्ट्रीय 'धुरंधर' मूवी को लेकर क्या कहते हैं 'बलूचिस्तान के बागी'? X पर पोस्ट कर बताई अपने दिल की बात

'धुरंधर' मूवी को लेकर क्या कहते हैं 'बलूचिस्तान के बागी'? X पर पोस्ट कर बताई अपने दिल की बात

फिल्म 'धुरंधर' पर बलूचिस्तान के लोगों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ ने फिल्म में बलोच संस्कृति और पाकिस्तान के अत्याचारों को दिखाने की सराहना की, वहीं कुछ ने चरित्र चित्रण और रिसर्च पर नाराजगी जताई। बलोच कार्यकर्ताओं ने इसे एक 'छोटा लेकिन सच्चा कदम' माना।

Dhurandhar movie, Dhurandhar Balochistan, Dhurandhar Baloch culture- India TV Hindi Image Source : RANVEERSINGH/INSTAGRAM फिल्म धुरंधर का एक सीन।

नई दिल्ली: रणवीर सिंह स्टारर स्पाई थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है। रिलीज के चंद दिनों के अंदर ही यह फिल्म घरेलू बाजार में 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी है। लेकिन फिल्म की सबसे ज्यादा चर्चा बलूचिस्तान के लोगों और बलोच राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं के बीच हो रही है, क्योंकि फिल्म में बलूचिस्तान, बलोच स्वतंत्रता आंदोलन और भारत-बलूचिस्तान संबंधों को काफी बड़े कैनवास पर दिखाया गया है। फिल्म में अक्षय खन्ना ने एक बलोच गैंगस्टर रहमान डकैत की भूमिका अदा की है। आइए, जानते हैं इस फिल्म को लेकर सोशल मीडिया साइट्स पर मौजूद 'बलोच' लोगों का क्या कहना है।

ज्यादातर बलोच यूजर्स ने की फिल्म की तारीफ

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई प्रमुख बलोच अकाउंट्स ने धुरंधर फिल्म को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ज्यादातर बलोच यूजर्स ने यह माना कि बॉलीवुड की किसी मुख्यधारा की फिल्म में बलोच संस्कृति, पहचान और पाकिस्तानी अत्याचारों का जिक्र अपने आप में बड़ी बात है, लेकिन कुछ लोगों ने फिल्म की रिसर्च और बलोच चरित्रों के चित्रण पर नाराजगी भी जताई है। प्रसिद्ध बलोच कार्यकर्ता मीर यार बलोच ने लंबा थ्रेड लिखकर फिल्म की आलोचना की। उन्होंने कहा कि फिल्म ने बलूचिस्तान को गैंगस्टरों की जमीन के रूप में दिखाया, जबकि बलोच स्वतंत्रता संग्राम का आधार राष्ट्रवाद है, धार्मिक उन्माद नहीं।

'बलोच खुद पाकिस्तानी आतंकवाद के शिकार'

मीर यार बलोच ने यह भी कहा कि बलोच कभी 26/11 जैसे आतंकी हमलों का जश्न नहीं मनाते क्योंकि वे खुद पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के शिकार हैं। मीर यार ने फिल्म के उस डायलॉग पर भी कड़ी आपत्ति जताई जिसमें पाकिस्तानी पुलिस अधिकारी कहता है, 'मगरमच्छ पर भरोसा किया जा सकता है, बलोच पर नहीं।' उन्होंने इसे बलोच संस्कृति और मय्यत यानी कि वफादारी की परंपरा के पूरी तरह खिलाफ बताया और कहा कि बलोच संस्कृति में 'एक गिलास पानी की कीमत 100 साल की वफादारी' होती है। हालांकि उन्होंने पाकिस्तान द्वारा बलूचिस्तान के लोगों पर किए गए अत्याचारों को, और बलोच संस्कृति को दिखाने के लिए फिल्म की तारीफ भी की।

'बलूचिस्तान की पहचान को खूबसूरती से दिखाया'

वहीं, पाकिस्तान से बगावती रुख रखने वाले बलोच यूजर्स ने फिल्म के सकारात्मक पक्षों की तारीफ भी की है। शाहान बलोच ने लिखा कि फिल्म में 'शेर ए बलोच' गाना और पारंपरिक बलोची ड्रेस में डांस के जरिए बलूचिस्तान की अलग पहचान को खूबसूरती से दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को यह फिल्म इसलिए खटक रही है क्योंकि इसमें 'फ्री बलूचिस्तान' का जिक्र है। एक अन्य प्रमुख बलोच एक्टिविस्ट सैमी बलोच ने लिखा, 'यह कोई डॉक्यूमेंट्री नहीं, एक एंटरटेनमेंट फिल्म है, फिर भी बलोच पहचान को इतने बड़े मंच पर दिखाना अपने आप में बड़ी बात है।' उन्होंने फिल्म में अक्षय खन्ना का बलोची लिबास में लुक और पाकिस्तानी अत्याचारों के जिक्र की खूब सराहना की।

फिल्म से संतुष्ट नजर आया बलोचों का बड़ा हिस्सा

सैमी ने यह भी कहा कि फिल्म में बलोच वफादारी पर जो नकारात्मक टिप्पणी है, वह पाकिस्तानी अधिकारी का डायलॉग है, संजय दत्त का नहीं, और यह पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा को ही दर्शाता है। कुल मिलाकर, बलोच समुदाय के एक बड़े हिस्से ने धुरंधर फिल्म को 'छोटा लेकिन सच्चा कदम' बताया, तो कुछ कार्यकर्ताओं ने इसे 'अपूर्ण चित्रण' करार दिया। कई लोगों ने यह भी कहा कि अब बलोच खुद अपनी कहानी पर फिल्म बनाना चाहते हैं जिसमें भारत और बलूचिस्तान की ऐतिहासिक दोस्ती और पाकिस्तान के खिलाफ साझा संघर्ष को सही तरीके से दिखाया जाए।

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