दिल्ली में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है और तापमान 46 डिग्री के पार पहुंच गया है। यही हाल महाराष्ट्र का भी है, जहां नागपुर, महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के अधिकांश शहर भीषण गर्मी की चपेट में हैं। मंगलवार को अमरावती में पारा चौंका देने वाले 46.8 डिग्री सेल्सियस और वर्धा में 46.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विभाग ने भीषण लू की चेतावनी जारी की है और कहा है कि क्षेत्र में जारी भीषण गर्मी अगले कुछ दिनों तक कम होने की संभावना नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार को अमरावती में अधिकतम तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो क्षेत्र में दिन का सबसे अधिक तापमान था। इसके बाद वर्धा में 46.5, अकोला में 46, नागपुर में 45.5, यवतमाल में 45.4, चंद्रपुर में 45.2, गढ़चिरोली में 44 डिग्री सेल्सियस, गोंदिया में 43.8, वाशिम में 43.5 और भंडारा में 43 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
आने वाले कुछ दिनों में राहत मिलने की संभावना नहीं
आईएमडी के नागपुर केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार ने पीटीआई से बात करते हुए कहा, "इस साल विदर्भ के कई हिस्सों, जिनमें नागपुर भी शामिल है, में पिछले सात-आठ दिनों से भीषण गर्मी पड़ रही है। नागपुर, वर्धा, अकोला, अमरावती और यवतमाल समेत विदर्भ के अधिकांश हिस्सों में आने वाले कुछ दिनों में गर्मी से राहत मिलने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा, पहले लू की स्थिति कुछ ही दिनों की होती थी और लोगों को कुछ दिनों बाद राहत मिल जाती थी। लेकिन इस साल तापमान लगातार 45 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जो बेहद चिंताजनक है। मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।”
दिल्ली में भीषण गर्मी का प्रकोप
राजधानी दिल्ली में हालात ऐसे हैं मानों दिल्ली आग की भट्ठी की तरह तप रही है। ताजा आंकड़ों में दिल्ली में कई इलाकों में सीजन का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया है। मौसम विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली के रिज इलाके में सबसे ज्यादा 46.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया है।
गर्मी से होने वाली बीमारियां
आईएमडी के नागपुर केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार ने कहा कि इस तरह की लगातार लू चलने से गर्मी से संबंधित बीमारियां बढ़ जाती हैं, जैसे कि हीट एग्जॉस्टशन और हीट स्ट्रोक का खतरा, खासकर शिशुओं और बुजुर्गों में। अत्यधिक गर्मी न केवल मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि पशुधन, जलीय जीवों को भी प्रभावित करती है और भूजल स्तर पर भी असर डालती है।
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