Exclusive: कोरियन गेम है कितना खतरनाक? कैसे बचाएं अपने बच्चों की जान, एक्सपर्ट ने क्या दी है सलाह
गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों ने बालकनी से कूदकर सुसाइड कर लिया, इसके साथ ही भोपाल में भी 14 साल के बच्चे ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बच्चों की आत्महत्या के पीछे की वजह ऑनलाइन गेम है। अपने बच्चों को कैसे बचाएं, जानें मनोचिकित्सक ने क्या बताया?

गाजियाबाद में बुधवार तड़के नौवीं मंजिल के एक फ्लैट की बालकनी से कथित तौर पर कूदने से तीन नाबालिग बहनों की मौत हो गई। मौत के इस मामले में ऑनलाइन गेम कोरियन गेम का नाम सामने आ रहा है। पुलिस ऑनलाइन गेम की भूमिका की जांच कर रही है, जिसकी उन्हें कथित तौर पर लत थी। तीनों लड़कियों के नाम - निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) था, कहा जा रहा है कि तीनों एक कोरियाई "लव गेम" खेलती थीं। इसी तरह भोपाल में भी एक नाबालिग छात्र ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली, उसकी मौत में भी गेम का ही एंगल सामने आया है।
कोविड के समय बच्चियों को लग गई थी लत्त
तीनों नाबालिगों के पिता चेतन कुमार ने बताया कि लड़कियां इस गेम को छोड़ना नहीं चाहती थीं। उन्होंने कहा, "उन्होंने मुझसे कहा था, 'पापा, हम कोरियाई भाषा नहीं छोड़ सकते। कोरियाई भाषा हमारी जिंदगी है। कोरियाई भाषा हमारे लिए सब कुछ है। आप हमें इससे अलग नहीं कर सकते। हम अपनी जान दे देंगे।' उन्होंने बताया, मैंने अभी-अभी सुसाइड नोट देखा है। यह बहुत दुखद है। मैं सभी अभिभावकों से अपील करता हूं कि वे सावधान रहें और यह सुनिश्चित करें कि बच्चे गेम से इतना ज्यादा लगाव न रखें।"
डीसीपी ट्रांस-हिंडन, निमिश पाटिल ने बताया कि उन्हें एक सुसाइड नोट मिला है जिसमें किसी खास ऐप का नाम नहीं है, लेकिन यह स्पष्ट है कि तीनों लड़कियां कोरियाई संस्कृति से प्रभावित थीं। पुलिस ने बताया कि कोविड-19 के दौरान से लड़कियां स्कूल नहीं जा रही थीं और अक्सर साथ में यह गेम खेलती थीं। गेम पर उनकी बढ़ती निर्भरता परिवार के लिए चिंता का विषय बन गई थी। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि माता-पिता लड़कियों के लगातार गेम खेलने पर आपत्ति जता रहे थे।
पीटीआई के अनुसार, एसीपी ने कहा, "तीनों लड़कियां सब कुछ एक साथ करती थीं - नहाने, खाने, सोने से लेकर स्कूल जाने तक।" यह घटना साहिबाबाद क्षेत्र के टीला मोर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत भारत सिटी की एक इमारत में हुई। पुलिस को सुबह करीब 2.15 बजे सूचना मिली कि तीन लड़कियां नौवीं मंजिल के फ्लैट की बालकनी से कूद गई हैं।
क्या है ये कोरियन गेम या लव गेम'?
कोरियाई 'लव गेम' एक ऑनलाइन, टास्क-आधारित इंटरैक्टिव गेम है। यह गेम 'ब्लू व्हेल चैलेंज' की तरह ही काम करता है, जिसमें खिलाड़ियों को 50 दिनों तक या स्टेप-दर-स्टेप टास्क (कार्य) पूरे करने होते हैं।
यह सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप के जरिए फैलता है, जहां सामने वाला व्यक्ति खुद को कोरियन या कोई विदेशी युवक/युवती बताकर दोस्ती करता है। शुरुआत में आसान टास्क दिए जाते हैं, जिससे खिलाड़ियों का भरोसा जीता जा सके। धीरे-धीरे टास्क गंभीर और हिंसक हो जाते हैं। जब खिलाड़ी टास्क पूरे नहीं करते या छोड़ना चाहते हैं, तो उन्हें डराया जाता है, ब्लैकमेल किया जाता है और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।
टास्क पूरे नहीं करने पर गेम एडमिनिस्ट्रेटर जान से मारने या परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देते हैं, जिससे खिलाड़ी डर के साये में जीने लगते हैं। इन गेम्स की लत इतनी खतरनाक होती है कि खिलाड़ी अपनी सामान्य जिंदगी, पढ़ाई-लिखाई और परिवार से कट जाते हैं। पीड़ित को यह महसूस कराया जाता है कि उनके पास आत्मघाती रास्ता ही एकमात्र विकल्प है। जब माता-पिता गेम खेलने से रोकते हैं, तो एडिक्टेड बच्चे अत्यधिक गुस्सा या निराशा में आकर ऐसा कदम उठा सकते हैं।
बच्चों के लिए क्यों है खतरनाक, बच्चे क्यों करते हैं सुसाइड?
- जानी मानी मनोचिकित्सक बिंदा सिंह ने बताया कि बच्चों पर ध्यान देना जरूरी है। ये ऐसे गेम होते हैं जिसमें बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। इसमें बच्चे जुए की तरह पैसे हार जाते हैं। इन गेम्स में अजीबोगरीब तरीके से ब्लैकमेलिंग की जाती है। सिंह ने एक वाकया बताया जिसमें एक बच्ची को गेम के दौरान हारने के बाद एक एक कर कपड़े उतारने को कहा जाता था, बच्ची वो हर बात मानती थी जो उसे कहा जाता था। उन्होंने बताया कि, एक बच्चे को तो अपने शरीर को ब्लेड से काटने को कहा गया था। ऐसे कई तरह के वाकये हैं जिसे सुनकर आप चौंक जाएंगे।
- बिंदा सिंह ने बताया कि चूंकि बच्चों की उम्र कम होती है और पहले तो इन्हें गेम खेलने में मजा आता है लेकिन जैसे ही टास्क पूरा नहीं हो पाता, वहीं से बच्चों को प्रताड़ित करने की शुरुआत होती है। इसमें ऐसे गेम भी होते हैं जिसे मंदबुद्धि बच्चे भी खेल सकते हैं। अक्सर हम बच्चों की जिद पर मोबाइल दे देते हैं और देखते नहीं कि वो क्या कर रहा है। बच्चे जब इन गेमिंग के जाल में फंस जाते हैं तो हारने के बाद परेशान रहते हैं और सबसे बड़ी बात होती है कि वो अपनी बातें शेयर नहीं करते।
- मनोचिकित्सक ने बताया, बच्चों को मोबाइल दें तो चौकस रहें, खासकर टीनएज बच्चों पर ध्यान देना जरूरी है। गेम खेलने के दौरान उनके बिहेवियर पर ध्यान दें। बच्चों को जब इन गेम्स की लत्त लग जाती है तो उनका एडिक्शन इतना बढ़ जाता है कि वो हिंसक हो जाते हैं।
- अगर बच्चे अगर कम बात करें, चुप रहें और अकेला रहना पसंद करने लगें, खासकर रात में सबके सोने के बाद जगे रहें और छुपकर गेम खेलने लगें तो ध्यान देना जरूरी है। अगर आपको पता चले कि बच्चे को गेम की एडिक्शन हो गई है और उनका व्यवहार बदल रहा है तो तुरंत उनसे प्यार से बात करना शुरू कर दें। उन्हें डांटे नहीं, क्योंकि डर के मारे बच्चे क्या झेल रहे हैं, वो बताते नहीं। अपने बच्चे पर ध्यान दें, मोबाइल दें लेकिन उसके साथ सावधान रहें।
डिस्क्लेमर: प्रशिक्षित और मान्यता प्राप्त मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) परामर्शदाताओं से परामर्श और सहायता प्राप्त करने के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14416 या 1800-891-4416 डायल करें।या TISS Icall 022-25521111 (सोमवार-शनिवार: सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक)
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