उच्चतम न्यायालय ने जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का अनुरोध करने वाली याचिका पर बृहस्पतिवार को केंद्र से जवाब मांगा और कहा कि हाल में पहलगाम घटना सहित जमीनी हकीकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी आर गवई ने कहा, ‘‘आपको जमीनी हकीकत को भी ध्यान में रखना होगा। पहलगाम में जो हुआ, उसे आप नजरअंदाज नहीं कर सकते।’’ वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन समेत वकीलों ने शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया था, जिसके जवाब में उन्होंने यह टिप्पणी की। उनके साथ पीठ में न्यायमूर्ति के. विनोद भी शामिल रहे।
जम्मू कश्मीर के पूर्ण राज्य वाले मामले पर SC में सुनवाई
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका खारिज करने का अनुरोध किया और कहा कि पहले भी अदालत ने ऐसी याचिकाओं पर जुर्माना लगाया था। मेहता ने कहा, ‘‘चुनाव होते हैं, ‘मॉय लॉर्ड’ देश के इस हिस्से से उभरने वाली विशेष स्थिति से अवगत हैं और निर्णय लेने की प्रक्रिया में कई विचार शामिल हैं।’’ पीठ ने शिक्षाविद् जहूर अहमद भट और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता अहमद मलिक द्वारा दायर याचिका को आठ सप्ताह के बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। भट्ट की ओर से पेश हुए शंकरनारायणन ने कहा कि संविधान पीठ का फैसला आए 21 महीने हो चुके हैं, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने समेत कई मुद्दों पर निर्णय हुआ था।
कोर्ट में क्या बोले सॉलिसिटर जनरल
उन्होंने कहा, ‘‘आंशिक रूप से कोई प्रगति नहीं हुई है, क्योंकि माननीय न्यायालय ने केंद्र पर भरोसा किया था जब उन्होंने अदालत के सामने यह बयान दिया था कि वे राज्य का दर्जा बहाल करेंगे।’’ निर्णय का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पीठ ने इस मुद्दे पर इसलिए विचार नहीं किया क्योंकि सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया था कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। शंकरनारायणन ने कहा कि पीठ ने केवल यह निर्देश दिया था कि राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाए, लेकिन कोई समय सीमा तय नहीं की थी। बता दें कि इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान पिटीशनर्स ने कहा कि 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर में चुनाव कराए और जल्दी से जल्दी पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करे।
सही समय पर बहाल किया जाएगा जम्मू कश्मीर राज्य का दर्जा
सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने जिस तरह चुनाव का वादा पूरा किया। उसी तरह जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा भी सही समय पर बहाल करेगी। तुषार मेहता ने कहा कि बड़ा सवाल ये है कि ये याचिका उस वक्त क्यों आई है, जब सिक्योरिटी सिचुएशन टेंस है। इस पर चीफ जस्टिस बी आर गवई ने कहा कि पेटिशनर को ये समझना चाहिए कि पहलगाम के आतंकी हमले के बाद के हालात की अनदेखी नहीं की जा सकती। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 8 हफ्ते के बाद करेगा।
याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस भी शामिल
बता दें कि जम्मू कश्मीर के पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस के भी नेता शामिल हैं। कांग्रेस, जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए आंदोलन भी चला रही है। जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि पहलगाम का हमला तो एक बहानेबाजी से ज्यादा कुछ नहींछ। जम्मू-कश्मीर जब राज्य था, तब भी उसने मजबूती से आतंकवाद का मुकाबला किया था। कर्रा ने कहा कि अब तक तो मोदी सरकार ही ढिंढोरा पीट रही थी कि जम्मू-कश्मीर खुशहाल हो गया है, यहां अमन है, अब जब सब ठीक है, तो फिर केंद्र सरकार, जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा क्यों नहीं बहाल करती।
(इनपुट-भाषा के साथ)
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