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Hindi News भारत राष्ट्रीय 75 years of independence: आजाद हिंदुस्तान का पहला मंत्रिमंडल कैसा था, किसे मिली थी सबसे बड़ी जिम्मेदारी

75 years of independence: आजाद हिंदुस्तान का पहला मंत्रिमंडल कैसा था, किसे मिली थी सबसे बड़ी जिम्मेदारी

75 years of independence: इस साल आजादी के 75 साल पूरे होने वाले हैं। इसी उपलक्ष में हम आजादी का 75 वां अमृत महोत्सव मना रहे हैं। हमारा देश 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से आजाद हो गया था जिसके बाद एक स्वतंत्र भारत की स्थापना हुई।

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Highlights

  • सरदार वल्लभ भाई पटेल को उप प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया
  • वित्त मंत्रालय का दायित्व आर.के.शनमुखम शेट्टी को दिया गया
  • संचार मंत्री के रूप में रफी अहमद किदवई को चुना गया

75 years of independenceइस साल आजादी के 75 साल पूरे होने वाले हैं। इसी उपलक्ष में हम आजादी का 75 वां अमृत महोत्सव मना रहे हैं। हमारा देश 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से आजाद हो गया था जिसके बाद एक स्वतंत्र भारत की स्थापना हुई। आज हम आपको एक अहम जानकारी बताएंगे इसके बारे में शायद आपको नहीं पता होगा। किसी देश को चलाने के लिए एक सरकार की जरूरत होती है जो देशहित और जनता के हित में फैसले ले सके। राष्ट्र में नियम कानून को बनाए रखें। जब हमारा देश आजाद हुआ था तो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में पंडित जवाहरलाल नेहरू में चुना गया। अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा देश के प्रथम प्रधानमंत्री तो चुन्नी है लेकिन और भी तो लोग होते हैं जो सरकार को सही तरीके से चलाते हैं जैसे विदेश मंत्री, मंत्री गृह मंत्री वगैरा-वगैरा।

आजाद भारत का पहला कैबिनेट मंत्रीमंडल
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को बनाया गया। सरदार वल्लभ भाई पटेल को उप प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया साथ ही साथ गृह मंत्रालय की भी जिम्मेदारी दी गई। डॉ राजेंद्र प्रसाद को खाद एवं कृषि मंत्रालय का कार्यभार देखने को मिला। वही रेल और परिवहन विभाग डॉक्टर जॉन मथाई को दिया गया। सरदार बलदेव सिंह को रक्षा मंत्री के रूप में चुना गया। वित्त मंत्रालय का दायित्व आर.के.शनमुखम शेट्टी को दिया गया। वही भीमराव अंबेडकर को विधि मंत्रालय सौंपा गया। राजकुमारी अमृत कौर को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया। जनसंघ के संस्थापक रहे डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग सौंपा गया। जगजीवन राम को श्रम मंत्रालय का कार्यभार संभालने को दिया गया। संचार मंत्री के रूप में रफी अहमद किदवई को चुना गया। वही खनन एवं ऊर्जा मंत्रालय वी एन गाडगिल को दिया है। ये आजाद भारत के पहले सभी कैबिनेट मंत्री बनाया गया था।

आजादी से पहले अंतरिम सरकार बनाई गई थी
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंग्रेज काफी कमजोर हो गए थे। वो इतना आप सक्षम नहीं थे कि भारत को गुलाम बनाकर रखा जा सके। एक तरफ देश में आजादी की आग लोगों के भीतर लगी हुई थी जिसे अंग्रेज अब सामना करने में पूरी तरह से असमर्थ हो गए थे। अंग्रेजों ने फैसला लिया कि अब भारत से निकलना ही उचित होगा। 1946 को आजाद करने का फैसला लिया गया लेकिन पूरी तरह से देश हमारा आजाद नहीं हुआ था। हालांकि भारत के आजाद होने से पहले 2 सितंबर 1946 को अंतरिम सरकार पंडित जवाहरलाल नेहरु के द्वारा बनाया गया था। इस अंतरिम सरकार में सरदार वल्लभ भाई पटेल, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, रामगोपालचारी, आसफ अली, शरद चंद्र बोस, जॉन मथाई जगजीवन राम, अली जाहिर और सीएच भाभा शामिल थे। लेकिन उस समय देश में एक तरफ संप्रदायिक दंगे जगह-जगह हो रहे थे। देश में मुस्लिम लीग ने एक अलग आग लगाई हुई थी। मुस्लिम लीग ने नए देश बनाने की मांग की और इसके साथ मुस्लिमों को नए देश बनाने के लिए एक मुहिम छेड़ने की ऐलान कर दी। जिसके बाद देश के हर कोने में हिंदू मुस्लिम आपस में एक दूसरे को काटते रहे। वहीं दूसरी तरफ भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी इन सभी सांप्रदायिक दंगों को रोकने के प्रयास में लगे हुए थे लेकिन जिन्ना ने जिस तरह से आज पूरे भारत में लगाई थी और रुकने का नाम नहीं ले रहा था। जिनालय अंतरिम सरकार बनाने का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया था। हालांकि बाद में वायसराय वेवेल के साथ जिन्ना की बैठक हुई और उन्हें अंतरिम सरकार में एक पड़ी पोजीशन दी गई।

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