चंडीगढ़: इंदरजीत सिंह सिद्धू 88 साल के हैं जिन्हें केंद्र सरकार ने पद्मश्री अवार्ड के लिए चुना है। वे रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी हैं। डीआईजी पद से रिटायर होने के बाद इस उम्र वे भी वे काफी एक्टिव हैं और अपना ज़्यादातर समय अपनी सोसाइटी और आस-पास के इलाकों की सफाई में बिताते हैं। वे पिछले एक दशक से ज़्यादा समय से चंडीगढ़ में अपने पड़ोस की सड़कों की सफाई कर रहे हैं। पिछले साल उनका वीडियो तब जब वीडियो में उन्हें चंडीगढ़ के सेक्टर 49 में अपने घर के पास सड़कों और पब्लिक जगहों से कचरा उठाते हुए दिखाया गया था। उनके वीडियो को सोशल मीडिया पर खूब तारीफ मिली, जिसके बाद उन्हें आधिकारिक पहचान मिली।
ज्यादातर समय साफ-सफाई में बिताते
सिद्धू सेक्टर 49 में एक IAS/IPS सोसाइटी में रहते हैं और अपना ज़्यादातर समय अपनी सोसाइटी और आस-पास के इलाकों की सफाई में बिताते हैं। वह पंजाब के संगरूर जिले के धूरी के बुगरा गांव के रहने वाले हैं। लोगों के वीडियो बनाने के बावजूद, सिद्धू ने बिना रुके अपना काम जारी रखा। उनका कहना है कि वे बस अपने आस-पास को साफ और हरा-भरा रखना चाहते हैं। उनकी कोशिशों के चलते पिछले साल 15 अगस्त को गवर्नर द्वारा एक अवॉर्ड की घोषणा करके सराहना की गई थी। हालांकि, सिद्धू सोशल मीडिया पर अचानक मिली अटेंशन के कारण घबरा गए और इवेंट में शामिल नहीं हुए।
1963 में पंजाब पुलिस में हुए थे भर्ती
सिद्धू 1963 में पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन के ज़रिए इंस्पेक्टर के तौर पर पुलिस में भर्ती हुए थे। 1981 में उन्हें IPS में प्रमोट किया गया। पंजाब में आतंकवाद के चरम पर होने के दौरान, उन्होंने 1986 में अमृतसर में सिटी SP के तौर पर काम किया। बाद में उन्होंने चंडीगढ़ में DIG, CID के तौर पर काम किया और 31 दिसंबर 1996 को रिटायर हो गए। उनकी पत्नी, दविंदर पाल कौर का 2023 में निधन हो गया। उनका बेटा अपने परिवार के साथ अमेरिका में रहता है, जबकि उनकी बेटी मोहाली में रहती है।
मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूरी
इंदरजीत सिंह सिद्धू मोबाइल फ़ोन नहीं रखते और मीडिया से दूर रहते हैं। जब उनका वीडियो वायरल हुआ, तो वह अपनी बेटी के पास रहने के लिए चंडीगढ़ से चले गए। सिद्धू का कहना है कि सफ़ाई अभियान के लिए उनकी प्रेरणा उन्हें पब्लिक सर्विस में बिताए सालों और अमेरिका में अपने बेटे से मिलने के दौरान मिली।
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