नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत तेज हो गई है। बुधवार शाम विदेश मंत्री एस. जयशंकर को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरगची का फोन आया। दोनों नेताओं ने मौजूदा हालात पर विस्तार से चर्चा की और आगे भी लगातार संपर्क में रहने पर सहमति जताई। ईरान के दूतावास के मुताबिक, इस बातचीत में दोनों पक्षों ने सीजफायर से जुड़े ताजा घटनाक्रम, द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार साझा किए।
'मौजूदा स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की'
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से मौजूदा स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की और संपर्क बनाए रखने पर सहमति बनी। इस बीच भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के उप-प्रतिनिधि मोहम्मद हुसैन जियाएनिया ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को खत्म करने में हर देश भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष 'दमन और आत्मरक्षा' के बीच का है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि हर देश की भूमिका सकारात्मक या नकारात्मक दोनों हो सकती है।
'...तो अप्रत्याशित तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं'
इधर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। ईरानी मीडिया के अनुसार, IRGC ने कहा है कि अगर तनाव और बढ़ता है तो वह 'अप्रत्याशित तरीकों' का इस्तेमाल कर सकती है। IRGC नौसेना के राजनीतिक मामलों के उपप्रमुख मोहम्मद अकबरजादेह ने कहा कि अगर अमेरिका ने कोई नई सैन्य कार्रवाई की, तो ईरान अपनी नई क्षमताओं का इस्तेमाल करेगा।
28 फरवरी को शुरू हुई US-इजरायल और ईरान की जंग
पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों के बाद शुरू हुआ था। इन हमलों में ईरान के 86 वर्षीय सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे समुद्री मार्गों में बाधा आई है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय है।
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