पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सभी पार्टियों ने तैयारी शुरू कर दी है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है और चुनाव का ऐलान होने के बाद सभी पार्टियों का घोषणापत्र भी जारी होगा। इस चुनाव में भी महिला वोटर्स को लुभाने के लिए पेंशन या खाते में सीधा पैसा देने वाली कई योजनाओं का ऐलान होना तय है। बंगाल से पहले बिहार, महाराष्ट्र, झारखंड जैसे राज्यों में भी महिलाओं के खाते में सीधा पैसा भेजने वाली योजनाओं ने चुनाव जीतने में मदद की है। इन सभी राज्यों में महिला मतदाताओं ने सरकार चुनने में निर्णायक भूमिका निभाई है। इसी वजह से अब हर चुनाव में सभी पार्टियों का पूरा ध्यान महिला मतदाताओं को लुभाने में रहता है।
देश में पहले चुनाव 1951-52 में हुए थे और तब महिलाएं चुनाव अधिकारी को अपना नाम तक बताने के लिए तैयार नहीं थीं। इस वजह से 28 लाख महिलाओं का नाम वोटर लिस्ट से कट गया था। इसके बाद हुए चुनाव में वोट डालने वाली महिलाओं की संख्या भी बेहद कम थी, लेकिन अब महिलाएं बढ़-चढ़कर चुनाव में भाग ले रही हैं और सरकार तय करने में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर आइए जानते हैं कि पिछले 76 सालों में देश में महिलाओं की हालत कैसे बदली है।
पहले चुनाव में सिर्फ 8 करोड़ महिला वोटर
पहले चुनाव में कुल 17.3 करोड़ मतदाता थे और इसमें लगभग 45 फीसदी महिलाएं थीं। इनमें से 28 लाख महिलाओं का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के बाद काट दिया गया था, क्योंकि वे अपना असली नाम बताने के लिए तैयार नहीं थीं। वह खुद को किसी की बहु, मां या बेटी कहलाना पसंद करती थीं और अजनबी लोगों को नाम नहीं बताती थीं। ऐसे में चुनाव आयोग ने एक महीने का समय दिया था। इसके बावजूद महिलाएं नाम बताने को तैयार नहीं हुईं और वोटर लिस्ट से बाहर हो गईं। 1951 और 1957 के चुनाव में महिला और पुरुष वोटर के अलग-अलग आंकड़े दर्ज नहीं किए गए थे। हालांकि, दोनों चुनाव में महिला मतदाताओं की संख्या 8-10 करोड़ के बीच थी, लेकिन वोट डालने वाली महिलाओं की संख्या बेहद कम थी। पहले चुनाव में सिर्फ 27,527 बूथ महिलाओं के लिए बने थे। वहीं, अब पिंक बूथ हर जिले में बड़े पैमाने पर बनाए जाते हैं।
कैसे बढ़ा महिलाओं का वोट शेयर
देश की आजादी के बाद धीरे-धीरे महिलाओं की स्थिति सुधरी। देश की आबादी साक्षर हुई और महिलाओं की साक्षरता दर तेजी से बढ़ी। इसका असर चुनावों में भी दिखने लगा। महिला मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ती गई और मतदान में उनकी भागीदारी भी बढ़ने लगी। शुरुआती दो चुनावों में बेहद कम महिलाएं वोट डालने के लिए घर से बाहर निकली थीं। वहीं, 1962 में 46 फीसदी से ज्यादा महिला वोटर्स ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। 1967 में यह आंकड़ा बढ़कर 55 फीसदी के पार पहुंच गया। वहीं, 1984-85 में 65 फीसदी से ज्यादा महिला वोटर्स ने वोट डाला। 1991-92 में यह आंकड़ा गिरकर 36 फीसदी के करीब पहुंच गया, लेकिन इसके बाद से लगातार महिलाओं का वोट प्रतिशत 50 के पार रहा है।
1961 से लोकसभा चुनाव में महिला-पुरुष वोट%
| साल |
पुरुष वोट % |
महिला वोट % |
| 1962 |
63.31 |
46.63 |
| 1967 |
66.73 |
55.48 |
| 1971 |
60.09 |
49.11 |
| 1977 |
65.63 |
54.91 |
| 1980 |
62.16 |
51.22 |
| 1984-85 |
61.2 |
58.6 |
| 1989 |
66.13 |
57.32 |
| 1991-92 |
61.58 |
51.35 |
| 1996 |
62.06 |
53.41 |
| 1998 |
65.72 |
57.88 |
| 1999 |
63.97 |
55.64 |
| 2004 |
61.66 |
53.3 |
| 2009 |
60.24 |
55.82 |
| 2014 |
67.09 |
65.3 |
| 2019 |
67.01 |
67.18 |
| 2024 |
65.6 |
65.8 |
2024 में पुरुषों से ज्यादा हुआ महिलाओं का वोट प्रतिशत
2024 लोकसभा चुनाव में महिलाओं का वोट प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा। यह पहला मौका था, जब राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं का वोट प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा था। इससे पहले अलग-अलग राज्यों में महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में ज्यादा मतदान किया था, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर 2024 में पहली बार ऐसा हुआ। 2024 लोकसभा चुनाव में पुरुषों का वोट प्रतिशत 65.6 था, जबकि महिलाओं का वोट प्रतिशत 65.8 था। इस चुनाव में कुल 65.79% मतदाताओं ने वोट डाला था।
14 राज्यों में महिला वोटर की संख्या पुरुषों से ज्यादा
2019 लोकसभा चुनाव में 91 करोड़ मतदाता थे। इनमें 47.34 करोड़ पुरुष और 43.85 करोड़ महिलाएं थीं। 2024 लोकसभा चुनाव में 12 राज्यों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा थी। अब 14 राज्यों में महिला वोटर्स की संख्या ज्यादा है। देश में कुल महिला मतदाताओं की संख्या 47 करोड़ के करीब है। हालांकि, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की प्रक्रिया के बाद इसमें बदलाव होने की संभावना है।
यह भी पढ़ें-
'कांग्रेस के रुख का कभी..., ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अपने बयान पर रहूंगा अडिग,' शशि थरूर का बड़ा बयान
तिरुमाला लड्डू घी मिलावट मामले में फाइनल चार्जशीट दाखिल, जानें कौन-कौन बना आरोपी?
Latest India News