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RSS के विदर्भ प्रांत कार्यालय का शिलान्यास, मोहन भागवत बोले- 'दुनिया में चल रहे युद्ध को भारत ही खत्म कर सकता है'

मोहन भागवत ने साफ किया कि स्वार्थ की वजह से सारे युद्ध हो रहे हैं। ऐसे में भारत ही इस युद्ध को रोक सकता है, क्योंकि भारत के लोग मनुष्यता का कानून मानकर चलते है, लेकिन बाकी दुनिया जंगल का कानून मानती है।

Mohan Bhagwat- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार (20 मार्च) को विश्व हिंदू परिषद के विदर्भ प्रांत के कार्यालय का शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया में कई युद्ध चल रहे हैं। इन्हें भारत ही रोक सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के चिंतकों के ध्यान में यह बात आती है कि चल रहे युद्ध में बार-बार देश से आवाज उठ रही है। इसको भारत ही समाप्त कर सकता है। शिलान्यास के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि सनातन धर्म का उत्थान ईश्वर इच्छा है। विश्व अभी लड़खड़ा रहा है। हम देखते हैं, बहुत ज्यादा बोलने की आवश्यकता नहीं है। सारी परिस्थिति हमारे सामने है। युद्ध होते हैं। युद्ध क्यों हो रहे हैं। इसकी वजह स्वार्थ है और कुछ नहीं है। वर्चस्व की कलह है। यह चाहिए, वह चाहिए। मेरे यहां नहीं है, मैं वहां से लाऊंगा, इसलिए वर्चस्व चाहिए।

विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि हमारे उदाहरण से, हमारी शक्ति के कारण आवाज सुनी जाएगी। सुनी जाएगी तो समझ में आएगी। हमारा उदाहरण देकर सारी दुनिया उसका अनुकरण करेगी, तब दुनिया ठीक होगी। दुनिया के चिंतकों के यह बात ध्यान में आती है। इस युद्ध को समाप्त भारत ही कर सकता है, क्योंकि भारत की इस प्रवृत्ति का ज्ञान उनको है, इसलिए काम होना है तो पहले हमको तैयार होना पड़ेगा।

दुनिया विनाश की कगार पर जा रही

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि मूल में है स्वार्थ प्रवृत्ति है, क्योंकि हम यह माने, दुनिया केवल जड़ है। 2000 वर्ष से प्रयोग किया। तरह-तरह के प्रयोग किए, लेकिन न कलह बंद हुई, न कट्टर पंथ के चलते एक दूसरे के बदलने का प्रयास बंद हुआ। आपस के कट्टरपंथ के चलते ऊंच-नीच मानना बंद नहीं हुआ। यह भी आज समस्या खड़ी है और दुनिया देख  रही है, हमने जो प्रयास किया कुछ तो अच्छा हुआ होगा, लेकिन उससे ज्यादा बहुत ज्यादा खराब हुआ है। दुनिया आज विनाश की कगार पर जा रही है, ऐसा लग रहा है इसका उपाय दूसरा कुछ नहीं है।

भारत मनुष्यता का कानून मानता है, दुनिया जंगल का कानून मानती है

भारत में धर्म का आचरण होना पड़ेगा। भारत में धर्म के पीछे शक्ति खड़ी होनी पड़ेगी समाज की। आखिर धर्म प्रवचन पुस्तकों में होता नहीं है, वह तो आचरण में प्रकट होता है। भारत के लोग मनुष्यता का कानून मानकर चलते है, लेकिन बाकी दुनिया जंगल का कानून मानती है।

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