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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा मंजूर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी मंजूरी

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने X पर एक पोस्ट करके उनके योगदान की सराहना की है। इस्तीफे के बाद अब नए उपराष्ट्रपति के नाम पर मंथन शुरू हो गया है।

Jagdeep Dhankhar resignation, Vice President of India resigns- India TV Hindi
Image Source : PTI FILE राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। धनखड़ ने सोमवार शाम को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जगदीप धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे अपने इस्तीफा पत्र में कहा था, 'मैं अपनी सेहत को प्राथमिकता देने और डॉक्टरों की सलाह मानने के लिए तुरंत प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे रहा हूं।' उन्होंने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 67(ए) का हवाला दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने X पर किया पोस्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'श्री जगदीप धनखड़ जी को भारत के उपराष्ट्रपति सहित कई भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है। मैं उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।' पीएम मोदी ने धनखड़ के लंबे सार्वजनिक जीवन और उनकी सेवाओं की सराहना की।

गृह मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना

मंगलवार को राज्यसभा में गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना पढ़ी गई, जिसमें जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को तुरंत प्रभाव से स्वीकार करने की बात कही गई। सत्र की अध्यक्षता कर रहे घनश्याम तिवारी ने दोपहर 12 बजे प्रश्नकाल के दौरान सदन को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'गृह मंत्रालय ने 22 जुलाई 2025 को जारी अधिसूचना में बताया कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत तुरंत प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है।'

गृह मंत्रालय की अधिसूचना

जगदीप धनखड़ का सियासी सफर

74 साल जगदीप धनखड़ अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति बने थे। वह राज्यसभा के पदेन सभापति भी थे। 6 अगस्त 2022 को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराकर शानदार जीत हासिल की थी। धनखड़ को 528 वोट मिले थे, जो पिछले तीन दशकों में किसी भी उपराष्ट्रपति के लिए सबसे ज्यादा थे। इससे पहले, धनखड़ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रह चुके हैं, जहां वह अक्सर राज्य सरकार के साथ टकराव के कारण सुर्खियों में रहे।

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