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Hindi News भारत राष्ट्रीय गुरु तेग बहादुर की औरंगजेब ने बेरहमी से करवाई थी हत्या, कश्मीरी पंडितों से जुड़ा है मामला, जानें पूरी कहानी

गुरु तेग बहादुर की औरंगजेब ने बेरहमी से करवाई थी हत्या, कश्मीरी पंडितों से जुड़ा है मामला, जानें पूरी कहानी

गुरु तेग बहादुर की औरंगजेब ने हत्या करवाई थी। औरंगजेब चाहता था कि गुरु तेग इस्लाम धर्म कबूल कर लें लेकिन गुरु ने ऐसा करने से मना कर दिया था।

Guru Tegh Bahadur- India TV Hindi Image Source : ANI/REPRESENTATIVE PIC गुरु तेग बहादुर

नई दिल्ली: सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर ने आज (24 नवंबर 1675) के ही दिन शरीर त्यागा था। मुगल बादशाह औरंगजेब ने उनकी बेरहमी से हत्या करवाई थी। गुरु तेग बहादुर अपने धर्म के प्रति निष्ठा रखते थे और उन्होंने कश्मीरी पंडितों के जबरन धर्म परिवर्तन कराने के मामलों का विरोध किया था। सिख धर्म में उन्हें काफी सम्मान दिया जाता है और हिंदू धर्म भी उनकी शहादत को नमन करता है।

कैसे बने सिखों के 9वें गुरु?

जब सिखों के 8वें गुरु हरिकृष्ण राय का निधन हुआ तो उनके बाद तेग बहादुर को सिखों का 9वां गुरु बनाया गया। दरअसल आठवें गुरु हरकिशन ने अपने निधन से पहले ये ऐलान किया था कि उनका उत्तराधिकारी बकाला में मिलेगा। इसके बाद बकाला में सभा बुलाई गई और तेग बहादुर को गुरु बनाने का ऐलान किया गया। 

कैसा था तेग बहादुर का बचपन?

गुरु तेग बहादुर का जन्म साल 1621 में हुआ था। वो छठे सिख गुरु हरगोबिंद के सबसे छोटे बेटे थे। गुरु तेग बहादुर के बचपन का नाम त्यागमल था और उनके पिता का नाम गुरु हरगोबिंद सिंह था। तेग बहादुर बचपन से ही निर्भीक और बहादुर थे। उनकी शिक्षा मां-पिता की देखरेख में हुई थी। उन्होंने बचपन में ही गुरुवाणी और धर्म शास्त्रों का अध्ययन कर लिया था और घुड़सवारी भी सीख ली थी।

वह जब 14 साल के थे, तभी उन्होंने अपने पिता के साथ मुगलों के हमले के खिलाफ वीरता का परिचय दिया था। उनकी वीरता से प्रभावित होकर उनके पिता ने उनका नाम तेग बहादुर रख दिया था। तेग बहादुर का अर्थ होता है तलवार का धनी।

कश्मीरी पंडितों का क्या है मामला

25 मई, 1675 को गुरु तेग बहादुर आनंदपुर साहब में एक संगत में बैठे हुए थे। इसी दौरान कश्मीर से कुछ लोगों का जत्था उनसे मिलने आया और उनसे प्रार्थना करते हुए कहा कि कश्मीर के गवर्नर इफ्तेखार खां (औरंगजेब का प्रतिनिधि) ने ये हुक्म दिया है कि या तो इस्लाम धर्म स्वीकार कर लें या उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाएगा। इस बात को सुनकर तेग बहादुर सोच में पड़ गए। 

हरि राम गुप्त द्वारा लिखित गुरु तेगबहादुर की जीवनी में कहा गया है, "गुरु तेग बहादुर ने कश्मीर से आए ब्राह्मणों से कहा कि वो औरंगजेब के प्रतिनिधियों से कहें कि अगर गुरु तेग बहादुर ने इस्लाम क़ुबूल कर लिया तो वो भी अपना धर्म बदल लेंगे।"

इसके बाद औरंगजेब ने आदेश दिया कि गुरु तेग बहादुर को दिल्ली में उनके सामने पेश करें और उनसे कहें कि उन्हें इस्लाम स्वीकार करना होगा, नहीं तो उनका जीवन खत्म कर दिया जाएगा। इसके बाद तेग बहादुर दिल्ली पहुंचे और इस दौरान उन्हें भीषण यातनाएं दी गईं। 

औरंगजेब की तमाम कठोर यातनाएं सहने के बावजूद गुरु तेग बहादुर ने इस्लाम स्वीकार करने से मना कर दिया। इस बात से बौखलाए औरंगजेब ने उन्हें और उनके साथियों को कठोर मौत दी। औरंगजेब ने भीड़ के सामने तेग बहादुर का सिर धड़ से अलग करवा दिया। 

जिस जगह गुरु तेगबहादुर ने शहादत दी थी, वहीं पर सीसगंज गुरुद्वारा बनाया गया है।

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