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नीतीश ने मुलायम को घेरा, पीएम मोदी पर भी कसा तंज

नई दिल्ली: 2 साल पहले देश के प्रधानमंत्री पद के दावेदार माने जाने वाले नीतीश कुमार आज बिहार मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाते नजर आ रहे हैं। लालू की मुखालफत करने वाले नीतीश कुमार आज लालू

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नई दिल्ली: 2 साल पहले देश के प्रधानमंत्री पद के दावेदार माने जाने वाले नीतीश कुमार आज बिहार मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाते नजर आ रहे हैं। लालू की मुखालफत करने वाले नीतीश कुमार आज लालू यादव को साथ लेकर चलने को तैयार हो गए हैं। विपरीत स्थिति यह है कि अब सुशासन पुरुष मोदी मॉडल के सामने मुकाबिल हैं। साल 2013 में करीब 18 साल बाद भाजपा से अलग होने वाले नीतीश कुमार अब जंगलराज पार्ट-2 के आरोपों का सामना कर रहे हैं, लेकिन वहीं नीतीश कह रहे हैं कि बिहार में विकास हुआ है, मगर बिहार में विकास पर लोग चर्चा करना नहीं चाहते हैं। पढ़िए चुनाव मंच पर क्या बोले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार:
 
नीतीश के लिए चुनाव अहम क्यों?

“बिहार के लोगों ने देखा है और जो कुछ भी हुआ है उससे लोग परिचित हैं। लोगों को अहसास है। फिर वो चाहे कोई भी क्षेत्र हो। कानून का राज हो, बुनियादी विकास हो या फिर लोगों की बुनियादी सुविधाओं की बात हो। तो हर तरफ विकास हुआ है और यह तीन मिनट में नहीं बयां किया जा सकता। बिहार में विकास हुआ है इस पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन हो नहीं रही है। बिहार में विकास के मायने क्या हैं इस पर चर्चा होनी चाहिए। मगर अब विरोधी विकास पर चर्चा नहीं कर रहे हैं। लगता है बिहार भाजपा में नेतृत्व का अकाल पड़ चुका है, क्योंकि चुनाव मोदी के नेतृत्व में लड़ा जा रहा है। अब जंगलराज पार्ट-2 शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन हमने कभी इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। आज जो बातें अप्रासंगिक हो चुकी हैं, उनकी बात की जा रही है। अब बिहार में कानून का राज है। अगर महिलाओं को शाम में बाजार जाने की जरूरत पड़े, तो उन्हें कोई डर नहीं है। बिहार में अपराध की दर पूरे देश की अपराध की दर से भी कम हैं।”
 
“बिहार काफी आगे बढ़ चुका है। जबरन प्रचार माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए एक ऐसा वातावरण बनाया जा रहा है लेकिन उसके बाद भी कोई भय का वातावरण नहीं बना। बिहार में कानून का राज है और वो बना रहेगा। साथ ही मैं उससे समझौता नहीं करूंगा। वहीं महागठबंधन ने तय कर दिया है कि हम अगर जीते तो कौन मुख्यमंत्री बनेगा। नेतृत्व मुझे ही देना है। विरोधियों के पास अन्य मुद्दों पर कहने को कुछ भी नहीं है। अब बात बहुत आगे बढ़ चुकी है। जो कुछ भी हुआ है साल 2005 के बाद के प्रयासों का फल है।”
 
एनडीए से दिक्कत पर बोले नीतीश-
 
“हम एनडीए में थे हमें कोई दिक्कत नहीं थी। अटल जी के वक्त में एनडीए नाम नहीं था। 1999 में इसे एनडीए नाम दिया गया। कुछ बुनियादी बातें थी, जब उन बातों से भटकाव दिखा तो हमें कोई विकल्प नहीं दिखा। तो अलग होना कोई राजनीतिक लाभ लेने के मकसद से किया गया फैसला नहीं था। अगर राजनीति में राजनीतिक आधार मिटने लगे तो हर किसी को फैसला लेना का अधिकार है। हमने समझौता नहीं किया और अलग होने के बारे में सबको बताया। वो बताएं कि ऐसी कौन सी बात हैं जिसके आधार पर वो कहते हैं कि नीतीश कुमार ने धोखा दिया, हम कोई निर्णय लेते हैं तो धोखा कैसे हुआ।”
 
भोजन तैयार था, पर नरेंद्र मोदी आए ही नहीं
 
“मैं अपनी विश्वास यात्रा पर था....उनकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी थी तो उसमें हमारा क्या मतलब। हम विश्वास यात्रा के कार्यक्रम के बीच में तब्दीली करके वहां गए...बाद में पता चला वो आए नहीं...मेरे घर सबका खाना बन गया था। बहुत खूबसूरत पंडाल लग गया..ऐसा खूबसूरत पंडाल कभी नहीं लगा.....सुशील मोदी ने मुझे इस पूरे मामले में उलझाया और उन्होंने खुद प्रोग्राम कैंसिल किया। वहीं उन्होंने कहा कि सुशील मोदी कुछ भी बोलते रहें ..वो मेरे साथी रहे हैं...वो बाहर टीका टिप्पणी करते रहें, पर व्यक्तिगत तौर पर वो मुझसे सहमत रहते हैं। नरेंद्र मोदी सुशील मोदी के बारे में सब कुछ जानते हैं..और वो भूलते नहीं है इसलिए मुझे कभी कभी उनके लिए डर भी लगता रहता है। अगर मैंने मोदी जी के हाथ की थाली छीन ली थी, तो उस वक्त इसे मुद्दा क्यों नहीं बनाया गया। नरेंद्र मोदी के सम्मान में मैने भोज मैने कैंसिल नहीं किया।”
 
महागठबंधन पर बोले नीतीश-
 
“दो बात आपने कह दी, तो बता देते हैं कि जो कई दलों के गठबंधन की बात चल रही थी, उसमें हम सक्रिय थे। मैने गठबंधन नहीं पार्टी बनाने की बात की थी, लेकिन मुलायम सिंह ने हाथ पीछे खींच लिए। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। बिहार के चुनाव पर यूपी की भी निगाहे हैं। क्या मुलायम सिंह यूनिवर्सिटी ऑफ सेक्युलरिज्म के वाइस चांसलर हैं और हम सब उस यूनिवर्सिटी के लिए उनको अर्जी दिए हैं क्या। मुझे किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। मैं जेपी और लोहिया जी की धरती से निकला हूं। काम से बोलना चाहिए, जुबान से नहीं बोलना चाहिए। लोहिया जी बोलते हैं कि आपका काम बोलना चाहिए।”
 
“देश में ऐसी व्यवस्था नहीं है कि कोई देश का प्रधानमंत्री रहते हुए किसी राज्य का मुख्यमंत्री भी बन जाए। ऐसा रहता तो वो गुजरात को अपने पास ही रखते। मोदी जी ने कहा था कि युवाओं को रोजगार मिलेगा..उनको मिलेगा क्या? कितने यूथ को रोजगार मिला? होनहार बिरवान के होत चीकने पात। आप एक साल में कुछ नहीं कर पाए तो आगे क्या करिएगा। चुनाव में लगे रहिएगा....घोषणा करिएगा। बिहार में भी आकर घोषणा पर घोषणा। क्या होता है घोषणा करने का। भाजपा को घोषणा करने में महारथ है। जनधन में कितने खाते सक्रिय हैं। खाता खुलने का लाभ कितनों के मिला है..आप बता दीजिए। आप गरीब का पैसा जमा कराकर अमीर को दे दिए। आपने कहा था कि 15 लाख देंगे..अरे गरीब आदमी की बोहनी तो करवा दिए। कितने वायदे किए गए। अरे साहब 16 महीने बीत गए। नारे गढ़ने के सिवाय कुछ हो नहीं रहा है। अब भाजपा का पर्दाफाश हो चुका है। पहली बार देश में किसी पीएम की जाति बताई जा रही है। बिहार में जाति के नाम पर वोट मांगे जा रहे हैं।”
 
डीएनए वाले सवाल पर बिफरे नीतीश
 
“मैने पीएम जी से गुजारिश की थी वो अपने शब्द वापस ले लें। वो हमें गाली देते है। मैं स्वतंत्रता सेनानी का बेटा हूं। आज वो लोग मेरा डीएनए गड़बड़ बताते हैं, जिनके पुरखों का आजादी के लड़ाई में कोई योगदान नहीं है। जेपी आंदोलन में मैं शामिल था..मेरा डीएनए गड़बड़ है क्या?  उन्होंने कहा कि जब संविधान में सब बराबर हैं तो डीएनए गड़बड़ वाली बात कहां से आई।”

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