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लुई बर्जर मामला: विपक्ष ने उठाई गोवा सरकार पर उंगली

पणजी: गोवा में कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी (AAP) ने बुधवार को कहा कि लुई बर्जर मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेतृत्व वाली सरकार बहुत कुछ छिपा रही है और मामले की जांच कर

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लुई बर्जर मामला: विपक्ष ने उठाई गोवा सरकार पर उंगली

पणजी: गोवा में कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी (AAP) ने बुधवार को कहा कि लुई बर्जर मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेतृत्व वाली सरकार बहुत कुछ छिपा रही है और मामले की जांच कर रही राज्य पुलिस की अपराध शाखा ने एक विदेश-वित्तपोषित परियोजना के कार्यालयों की तलाशी ली और कई दस्तावेज जब्त किए। राज्य कांग्रेस व आप ने यहां कहा कि सरकार द्वारा केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जगह अपराध शाखा द्वारा जल्दी से जांच करवाने का फैसला लेना दर्शाता है कि वह जांच प्रक्रिया में हेरफेर का प्रयास कर रही है।

कांग्रेस प्रवक्ता दिगंबर कामत ने कहा, "सरकार द्वारा CBI की जगह गोवा पुलिस की अपराध शाखा से जांच करवाना यह दर्शाता है कि वह कुछ छिपा रही है, खासकर मोपा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट सौदे के संबंध में।"

लुई बर्जर को तकनीकी परामर्श का एक अन्य ठेका गोवा में सत्ताधारी भाजपा नेतृत्व वाली सरकार ने 2013 में दिया था। इस ठेके के तहत मोपा में एक हरित हवाईअड्डे के निर्माण में मदद करनी थी। लाखों डालर कीमत वाली यह परियोजना भी सवालों के घेरे में है।

इस बीच, आप ने रिश्वतखोरी के आरोपों पर जिस प्रकार रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर तथा मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी उसके लिए दोनों पर सवाल उठाए।

आप नेता वाल्मीकि नाईक ने मीडिया से कहा, "यदि पर्रिकर को लुई बर्जर के भ्रष्टाचार मामले के बारे में नेता प्रतिपक्ष रहते और उसके बाद मुख्यमंत्री रहते खास जानकारी थी तो उन्होंने इस बारे में क्यों कुछ नहीं किया? क्या करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार मामले की जानकारी को दबाकर रखना अपने आप में भ्रष्टाचार का मामला नहीं बनता है?"

नाईक, पर्रिकर द्वारा 19 जुलाई को की गई उस टिप्पणी का जिक्र कर रहे थे, जिसमें पर्रिकर ने संकेत दिया था कि इस मामले में दो मंत्री शामिल थे और यह सौदा दक्षिण गोवा के एक बंगले में हुआ था।

उल्लेखनीय है कि लुई बर्जर के शीर्ष अधिकारियों ने भारत, वियतनाम, इंडोनेशिया और कुवैत जैसे एशियाई देशों में ठेके हासिल करने के लिए 39 लाख डॉलर रिश्वत देने का दोष स्वीकार कर लिया है।

अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा घोषित दस्तावेजों में हालांकि रिश्वत स्वीकारने वाले राजनीतिज्ञों और अधिकारियों के नाम नहीं हैं, लेकिन दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि गोवा के एक मंत्री और अन्य अधिकारियों को 2009-10 में 976,630 डॉलर की रिश्वत दी गई थी।

जानकार सूत्रों ने कहा है कि गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत और पूर्व लोक निर्माण मंत्री चर्चिल अलेमाओ रिश्वतखोरी मामले की जांच के दायरे में आ सकते हैं। कामत और अलेमाओ ने इस मामले में अपनी संलिप्तता से इंकार किया है।

लुई बर्जर उस कंर्सोटियम का हिस्सा थी, जिसने गोवा में अरबों डालर की एक जल एवं सीवरेज परियोजना के क्रियान्वयन का ठेका हासिल किया था। इस परियोजना को जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी ने फंडिंग की थी।

इस बीच, मामले की जांच कर रही अपराध शाखा ने बुधवार को जल तथा सीवेज प्रबंधन परियोजना के कार्यालयों की तलाशी ली।

पुलिस सूत्र के मुताबिक, "परियोजना से जुड़े कई दस्तावेजों को जब्त किया गया है।"

पुलिस महानिरीक्षक (IG) सुनील गर्ग ने कहा कि लुई बर्जर अंतर्राष्ट्रीय रिश्वतखोरी मामले में निस्संदेह भ्रष्टाचार हुआ है और कंपनी के आरोपित अधिकारियों को सम्मन करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

आप ने मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर द्वारा लुई बर्जर को पिछले सप्ताह दी गई क्लीन चिट पर भी सवाल खड़े किए, जिस पर 2010 में गोवा के एक मंत्री और अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप है।

आप ने इस पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई से कराने की मांग की है।

नाईक ने सवाल किया, "मुख्यमंत्री किस आधार पर ऐसा कह रहे हैं। जब मामले की पुलिस जांच चल रही है, तो वह सर्टिफिकेट कैसे दे सकते हैं?"

गोवा पुलिस ने मंगलवार रात दर्ज एक प्राथमिकी में लुई बर्जर का नाम शामिल किया है। प्राथमिकी में शामिल अन्य आरोपियों में 'कुछ मंत्रियों' का जिक्र है।

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