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लद्दाख में प्रदेश अध्यक्ष के इस्तीफे पर भाजपा बोली, 'पार्टी एक व्यक्ति से नहीं चलती'

सेरिंग ग्यालपो ने कहा कि यूटी प्रशासन स्थानीय जनता की समस्याओं के प्रति अगंभीर रवैया अख्तियार किए हुए है। बाहर फंसे लद्दाख के लोगों की घरवापसी नहीं हो पा रही है।

BJP Supporters- India TV Hindi Image Source : PTI (FILE) Representational Image

नई दिल्ली. केंद्रशासित लद्दाख में प्रदेश अध्यक्ष सहित दो नेताओं के इस्तीफे के बाद भाजपा पूरे प्रकरण की समीक्षा कर रही है। हालांकि पार्टी नेताओं के इस्तीफे को भाजपा अपने लिए चिंता की बात नहीं मानती है। भारतीय जनता पार्टी के एक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने नाम न छापने की शर्त पर आईएएनएस से गुरुवार को इन आरोपों को खारिज किया कि लद्दाख प्रशासन ने संकट के समय स्थानीय जनता का सहयोग नहीं किया।

उन्होंने कहा कि लद्दाख प्रशासन कोरोना वायरस से उत्पन्न संकट के बीच हर संभव बचाव राहत कार्य कर रहा है। इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रहे संबंधित राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने इस्तीफे के सवाल कहा, "देखिए पार्टी किसी एक व्यक्ति से नहीं चलती। पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकतार्ओं के आपसी सहयोग से चलती है। किसी एक-दो के नाराज होकर साथ छोड़ने से पार्टी पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। लद्दाख में सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ता संतुष्ट होकर पार्टी के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।"

दरअसल लद्दाख के प्रदेश अध्यक्ष चेरिंग दोरजी ने बीते रविवार को अचानक पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भेजे इस्तीफे में लद्दाख प्रशासन पर लॉकडाउन के दौरान बाहर फंसे स्थानीय नागरिकों की मदद न करने का आरोप लगाया था। कहा था कि देश भर में फंसे अपने लोगों को निकाल पाने में नाकाम साबित होने पर उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया।

प्रदेश अध्यक्ष चेरिंग दोरजी ने कहा था कि लद्दाख के 20 हजार से ज्यादा लोग बाहर के प्रदेशों में फंसे हैं। मगर केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन लद्दाख के लोगों की परेशानियों को लेकर असंवेदनशील बना रहा। यूटी प्रशासन से लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक से शिकायत के बाद भी समस्याएं दूर न होने पर उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया।

उन्होंने प्रशासन पर लेह और कारगिल दोनों की स्वायत्त पहाड़ी परिषदों को निष्प्रभावी बनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन इन परिषदों के कामकाज में उनकी मदद नहीं कर रहा है।

उधर प्रदेश अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद दूसरे दिन मंगलवार को ही पार्टी के एक और नेता सेरिंग ग्यालपो ने भी इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने भी पार्टी से इस्तीफे के पीछे वही वजह बताई जो कि प्रदेश अध्यक्ष चेरिंग दोरजी ने बताई थी।

सेरिंग ग्यालपो ने कहा कि यूटी प्रशासन स्थानीय जनता की समस्याओं के प्रति अगंभीर रवैया अख्तियार किए हुए है। बाहर फंसे लद्दाख के लोगों की घरवापसी नहीं हो पा रही है। उन्होंने भी आरोप लगाया कि लेह और कारगिल के परिषदों को यूटी प्रशासन ने प्रभावहीन बना दिया है।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि पहले तो इन दो नेताओं के इस्तीफे से पार्टी में हलचल जरूर मची। मगर पार्टी ने जब राज्य के अन्य नेताओं से संपर्क किया तो उनकी पार्टी से कोई शिकायत नहीं रही। जिससे समझ में आया कि पार्टी के सिर्फ यही दो नेता व्यक्तिगत कारणों से नाराज होकर इस्तीफा दिए हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इन दो नेताओं के इस्तीफा देने से इस केंद्रशासित प्रदेश के भाजपा के संगठन पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। पार्टी नए चेहरे को जल्द कमान सौंप सकती है।

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