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सोमवार को ममता-मंगलवार को मायावती, पीएम की कुर्सी का कौन-कौन दावेदार?

ऐसा पहली बार है जब चुनाव में नीति और नीयत की बात नहीं हो रही। बात हो रही है तो सिर्फ मोदी की। ऐसा लग रहा है जैसे मोदी प्रधानमंत्री नहीं राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे हैं जिसमें पार्टी नहीं चेहरा मायने रखता है। तभी तो मोदी महागठबंधन की नीयत पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

IndiaTV Hindi Desk
IndiaTV Hindi Desk 22 Jan 2019, 11:05:52 IST

नई दिल्ली: लोकसभा चुनावों की उल्टी गिनती जारी है और इसी के साथ मोदी बनाम महागठबंधन की टक्कर भी और तेज हो रही है। दो दिन पहले मोदी के खिलाफ 22 दलों के नेताओं ने ममता बनर्जी के नेतृत्व में एक मंच पर आकर हुंकार भरी लेकिन महागठबंधन का चेहरा कौन होगा, पीएम पद का दावेदार कौन होगा ये अबतक साफ नहीं है। इसी असमंजस पर बीजेपी ने निशाना साधते हुए महागठबंधन को नया फॉर्मूला दिया है, सप्ताह के हर दिन एक नया प्रधानमंत्री। ये फॉर्मूला दिया है उत्तर प्रदेश के एक मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने। 

सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा, ‘’हफ्ते में सात दिन होते हैं और 7 दिन में आप पीएम एक-एक दिन कर लो। ये बीजेपी का बड़ा सुझाव है। सोमवार को ममता जी बन जाएं, मंगलवार को मायावती जी बन जाएं, बुधवार को अखिलेश यादव जी बन जाएं, बृहस्पति को चंद्रबाबू नायडू जी बन जाएं, शुक्रवार को केजरीवाल जी बन जाएं और क्योंकि शनिवार-रविवार सरकार काम नहीं करती तो उस दिन राहुल गांधी जी प्रधानमंत्री बन जाएं।‘’

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बीजेपी में कोई द्वंद नहीं है क्योंकि मोदी ही प्रधानमंत्री के चेहरा हैं और बीजेपी उन्हीं के नाम पर चुनावी वैतरणी पार करने उतरी है लेकिन विपक्ष में पीएम पद के दावेदारों का पूरी जमात तैयार है। जिस सूबे पर नजर डालिए, एक दावेदार खड़ा मिल जाएगा। दिल्ली में राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल, उत्तर प्रदेश में मायावती और मुलायम सिंह यादव, आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू, कर्नाटका में एचडी देवेगौड़ा, तेलंगाना में KCR और बंगाल में ममता बनर्जी खुद तैयार हैं। 

इनमें से कौन होगा प्रधानमंत्री पद का दावेदार है, ये बात महागठबंधन में शामिल खुद 22 दलों के नेता भी नहीं जानते हैं लेकिन हर तरफ से मोदी के खिलाफ आवाज उठ रही है और रैलियां हो रही हैं। विपक्ष के बड़े-बड़े चेहरे एक मंच पर आकर मोदी के खिलाफ शोर मचा रहे हैं। ऐसे में पीएम मोदी भी कहां चूकने वाले थे, बोले ये चौकीदार का खौफ ही है कि विरोधी त्राहिमाम कर रहे हैं।

आज से पहले इस देश की ऐसी सियासी तस्वीर कभी नहीं दिखी जैसी इस बार दिखी है। दर्जनों पार्टियां सिर्फ मोदी विरोध की बुनियाद पर हाथ मिला रही हैं। 19 जनवरी को कोलकाता में जो रैली हुई उसके किरदार और आधार भी मोदी ही थे। मोदी की एक्सपायरी डेट का ऐलान करने वाली दीदी भी जानती होंगी कि इतने चेहरों के साथ आगे बढ़ने की डगर बहुत कठिन है क्योंकि यहां एक अनार सौ बीमारी वाली हालत है।

प्रधानमंत्री की कुर्सी एक है और महागठबंधन में दावेदार कई हैं, जो अभी तो खामोश हैं लेकिन वक्त आने पर ख्वाहिशें खुलकर सामने आ जाएंगी। तभी तो मोदी इस महागठबंधन को अनोखा संगम कहते हैं। इसी रैली में शरद यादव भी शामिल थे। मोदी पर हमला करने के लिए माइक थामा तो राफेल की जगह जुबान पर बोफोर्स घोटाले का नाम आ गया। दीदी ने गठबंधन धर्म निभाते हुए शरद यादव की भूल सुधार दी लेकिन पीएम मोदी ने कहा शरद यादव ने जो कहा वो गलती नहीं सच है जो सामने आ गया। 

ऐसा पहली बार है जब चुनाव में नीति और नीयत की बात नहीं हो रही। बात हो रही है तो सिर्फ मोदी की। ऐसा लग रहा है जैसे मोदी प्रधानमंत्री नहीं राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे हैं जिसमें पार्टी नहीं चेहरा मायने रखता है। तभी तो मोदी महागठबंधन की नीयत पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पीएम मोदी कहते हैं, ‘’सारी बीजेपी कहती है ये मोदी बनाम शोर है जिसके पीछे चोर हैं जो खुद को बचाने के लिए एक मजबूरी में एक दूसरे का हाथ पकड़ रहे हैं।‘’

जो पार्टियां एक दूसरे को फूटी आंख नहीं भाती थीं, जिनका सियासी वजूद ही एक दूसरे के विरोध पर टिका है वो भी मोदी के डर से साथ आ गए हैं। सबसे बड़ी मिसाल मायावती और अखिलेश की है। तभी तो मोदी बुआ और बबुआ के बेमेल जोड़ पर जोरदार हमला करते हैं। महागठबंधन पर हमलों की बौछार तो मोदी ने पिछले साल से ही शुरू कर दी थी लेकिन जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं हमला और भी धारदार होता जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिना पीएम के चेहरे के चुनाव लड़ रहे महागठबंधन के महारथी मोदी का मुकाबला कैसे करेंगे।

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