नई दिल्ली: नोटों की ऐसी मूसलाधार बारिश आपने इससे पहले शायद कभी नहीं देखी होगी। आसमान से नोट ही नोट बरसे और जमीन पट गई नोट से।
इस बारिश में नोट भी तरह-तरह के थे। पचास के नोट, सौ के नोट, पांच सौ के नोट और यहां तक कि हजार के नोट।
दरअसल ये बारिश गुजरात के जामनगर में हुई यहां पर अहीर समाज ने एक लोक-संगीत के कार्यक्रम का आयोजन किया था।
ये आयोजन अफ्रीका में रहने वाले एक एनआऱआई ने करवाया था।
कार्यक्रम के दौरान ही लोगों ने अपनी-अपनी तरफ से नोट उड़ाने शुरू कर दिए। फिर तो जैसे नोट उड़ाने की प्रतियोगिता ही शुरू हो गई. चारों तरफ नोट ही नोट बिखरे थे...
इस कदर नोट बरसे कि स्टेज में हारमोनियम बजा रहे कलाकार की हारमोनियम भी नोटों से ढक गई..
आसमान से इतने नोट उड़े कि वहां मंच पर चारों ओर नोट ही नोट बिखर गए.. कुछ ही देर में पूरे स्टेज पर साढ़े चार करोड़ ने नोटों का ढेर लग गया
इस इलाके में ये अनोखी सी परंपरा है। लोक-संगीत का कार्यक्रम होता है। लोग जमा होते हैं। फिर भक्ति-संगीत का कार्यक्रम होता है। लोग इसी तरह नाचते-गाते हैं और इसी तरह नोटों की बरसात होती है।
आयोजकों का कहना है कि इस तरह जो पैसे जमा होते हैं, उसे गौ समाज और सामाजिक कार्यक्रमों में खर्च किया जाता है।
लेकिन, सवाल तो उठता है कि क्या नोटों को इस तरह उड़ाना देश की मुद्रा का अपमान नहीं है। परंपरा अपनी जगह है। लेकिन, खुलेआम यूं नोट को उड़ाना कहीं से भी जायज नहीं ठहराया जा सकता है।
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