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आयुष्मान भारत योजना: पश्चिम बंगाल में ममता ने बंद की मोदी की योजना

आयुष्मान योजना के लिए केंद्र और राज्य के हिस्से का अनुपात 60:40 तय किया गया है। आयुष्मान भारत एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है जो 10 करोड़ गरीब और कमजोर परिवारों को 5 लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराती है।

IndiaTV Hindi Desk
IndiaTV Hindi Desk 11 Jan 2019, 11:06:55 IST

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को ऐलान किया कि राज्य ने केंद्र की आयुष्मान भारत योजना से बाहर आने का फैसला किया है और नरेंद्र मोदी नीत राजग सरकार पर स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम के तहत ‘बड़े-बड़े दावे’ करने का आरोप लगाया। सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार ने योजना से अलग होने के अपने निर्णय के बारे में जानकारी देने के लिए केंद्र को पत्र लिख है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल अगस्त में महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत या राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना का शुभारंभ किया था। इसका लक्ष्य प्रति परिवार का पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कराकर 10 करोड़ से ज्यादा गरीब और वंचित परिवारों को (करीब 50 करोड़ लाभार्थी को) इस योजना के दायरे में लाना है। इस योजना के तहत 60 प्रतिशत खर्च केंद्र और 40 फीसदी व्यय राज्य वहन करता है।

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तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने प्रत्येक घर में योजना के बारे में बताने के लिए पत्र भेजा है जिसमें उनकी फोटो और कमल का चिन्ह है। ऐसा करके उन्होंने स्वास्थ्य योजना का ‘राजनीतिकरण’ किया है। बनर्जी ने कहा कि केंद्र इन पत्रों को भेजने के लिए डाक कार्यालयों का ‘इस्तेमाल’ कर रही है।

उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘ आप (नरेंद्र मोदी) राज्य के हर घर में अपनी तस्वीरों को लगाकर पत्र भेज रहे हैं और योजना का श्रेय लेने के लिए बड़े-बड़े वायदे कर रहे हैं तो, मैं 40 प्रतिशत का खर्च क्यों वहन करूं? राजग सरकार को पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।’’ मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर किसानों को फसल बीमा के फायदों को लेकर ‘झूठे दावे’ करने का भी आरोप लगाया। इस योजना में राज्य सरकार 80 प्रतिशत का व्यय वहन कर रही है।

आयुष्मान योजना के लिए केंद्र और राज्य के हिस्से का अनुपात 60:40 तय किया गया है। आयुष्मान भारत एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है जो 10 करोड़ गरीब और कमजोर परिवारों को 5 लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराती है। 

पश्चिम बंगाल सरकार ने 2017 में ऐसी ही एक 'स्वास्थ्य साथी' योजना शुरू की थी। जो राज्य के लोगों को पेपरलेस और कैशलेस स्मार्ट कार्ड के आधार पर सुविधाएं देती है। बता दें कि ओडिशा, दिल्ली, केरल और पंजाब चार और ऐसे राज्य हैं, जिन्होंने आयुष्मान योजना को नहीं अपनाया है।

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