नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते हालात काफी गंभीर हो चुके हैं। दुनिया के अधिकांश देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ ररहा है। इस वैश्विक संकट पर चर्चा के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक हुई। संसद भवन में हुई इस बैठक में पक्ष और विपक्ष के कई नेता शामिल हुए जबकि ममता बनर्जी की टीएमसी ने इस बैठक का बॉयकॉट कर अपना विरोध जताया है। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में जब विदेश मंत्री एस जयशंकर से ईरान युद्ध में मध्यस्थता को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तान की तरह दलाल नहीं हो सकते।
सूत्रों के मुताबिक जब विदेश मंत्री से पाकिस्तान की ईरान युद्ध में मध्यस्थता वाली बात पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा "ये तो 1981 से चल रहा है.. US ने सालों से पाकिस्तान को ईरान के साथ बातचीत में लगा रखा है…We arer not Dalal nation
इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, जेपी नड्डा, जेडीयू से लल्लन सिंह और संजय झा, कांग्रेस से तारिक अनवर और मुकुल वासनिक, सीपीआईएम से जॉन ब्रिटास, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी भी मौजूद रहे। सरकार की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात पर ब्रीफिंग दी।
विपक्ष की तरफ से ऑल पार्टी मीटिंग में शामिल होने वाले नेता
- कांग्रेस- मुकुल वासनिक, तारिक अनवर
- SP- जावेद अली
- CPM- जॉन ब्रिटास
- AAP- संजय सिंह
- DMK- कलानिधि वीरसामी
- CPI- शायद नहीं आएंगे क्योंकि फ्लोर लीडर्स चुनावी राज्यों में हैं
- UBT सेना- संजय राउत
- NCP(SP)- सुप्रिया सुले
- TDP- लवू कृष्णा
- RJD- अभय कुशवाहा
- AIMIM-असदुद्दीन ओवैसी
वहीं टीएमसी ने इस बैठक का बहिष्कार किया है। सर्वदलीय बैठक पर TMC MP सौगत रॉय ने कहा, "पूरी लड़ाई BJP से चल रही है, हम उनके साथ क्या मीटिंग करेंगे?
बैठक में क्या हुआ?
सूत्रों के मुताबिक राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार ने एक मजबूत और आश्वस्त करने वाला संदेश दिया कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच हालात पूरी तरह से नियंत्रण में है। चिंतित होने की जरूरत नहीं है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी द्वारा एक डिटेल्ड प्रजेंटेशन के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी बताया कि कच्चे तेल, एलपीजी और अन्य आवश्यक आपूर्ति की पर्याप्त उपलब्धता के साथ ऊर्जा सुरक्षा स्थिर बनी हुई है। भारत की मजबूत शोधन क्षमता उर्वरकों सहित निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। चार शिप आ चुके हैं और आने की उम्मीद है। सरकार ने अपनी सक्रिय कूटनीतिक पहुंच पर जोर दिया और कहा कि भारत सभी पक्षों के संपर्क में है। जहाज आ रहे हैं और सप्लाई लाइनें एक्टिव हैं। यह देश के लिए एक कूटनीतिक सफलता है।
लोगों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता
सुरक्षा के मामले में, सरकार ने ज़ोर दिया कि कोई घबराहट नहीं है, भारतीय दूतावास नागरिकों की सक्रिय रूप से मदद कर रहे हैं, और लोगों को निकालने की योजनाएं तैयार हैं,लोगों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। श्रीलंका के पास पनडुब्बी गतिविधि की रिपोर्टों सहित सुरक्षा चिंताओं के बारे में, यह स्पष्ट किया गया कि अगर भारत को कोई खतरा होता, तो उसे निर्णायक रूप से संभाला जाता।
AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई से जुड़े मुद्दे भी उठाए, सरकार ने कहा कि जैसे ही चैनल फिर से खुले, डिप्लोमैटिक संपर्क शुरू किया गया। कुल मिलाकर, मीटिंग का बड़ा संदेश साफ़ था कि संघर्ष जारी रहने को लेकर अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत हर स्तर पर तैयार है, अपने लोगों को प्राथमिकता दे रहा है, और कोऑर्डिनेटेड डिप्लोमैटिक, स्ट्रेटेजिक और आर्थिक प्रयासों के ज़रिए स्थिति से निपटने का भरोसा रखता है।
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