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Coffee Par Kurukshetra: अयोध्या चढ़ावा चोरी मामले में SIT की जांच कहां तक पहुंची? देखें पूरी चर्चा

राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। पूरी चर्चा "कॉफी पर कुरुक्षेत्र" में देखें-

Coffee Par Kurukshetra: इंडिया टीवी के लोकप्रिय कार्यक्रम "कॉफी पर कुरुक्षेत्र" में आज यानी मंगलवार को अयोध्या से जुड़ा एक अहम मुद्दा चर्चा के केंद्र में रहा। कार्यक्रम में बताया गया कि शेषावतार मंदिर पर ध्वजारोहण कार्यक्रम इस बार सादगी के साथ आयोजित किया गया। पहले इसे भव्य रूप देने की तैयारी थी, लेकिन लखनऊ अग्निकांड के चलते आयोजन को सीमित रखा गया। डिप्टी सीएम के शामिल होने की संभावना थी, लेकिन उन्होंने कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। चर्चा में शो की एंकर पीनाज त्यागी और इंडिया टीवी के पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पराशर के साथ मेहमान के तौर पर वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल और राजनीतिक विश्लेषक शांतनु गुप्ता मौजूद रहे।

मंदिर परिसर में कैमरों पर रोक

चर्चा के बीच एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई कि इस बार एक बड़ा बदलाव यह देखने को मिला कि मंदिर परिसर के भीतर कैमरों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। आमतौर पर राम मंदिर से जुड़े हर आयोजन में मीडिया की मौजूदगी रहती थी, लेकिन इस बार निजी, सरकारी या किसी भी एजेंसी के कैमरों को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इससे कार्यक्रम को लेकर रहस्य और बढ़ गया।

चंपत राय की मौजूदगी पर टिकी नजरें

कार्यक्रम के दौरान इस बात पर भी चर्चा रही कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय इस आयोजन में मौजूद रहेंगे या नहीं। उनकी उपस्थिति या अनुपस्थिति को ट्रस्ट में उनकी स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है। अगर वह दूरी बनाए रखते हैं, तो इससे उनके भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।

चढ़ावा चोरी मामले में SIT की जांच

कार्यक्रम में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले पर भी विस्तृत चर्चा हुई। जांच कर रही एसआईटी ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। इसके बाद चढ़ावा गिनने वाली पूरी टीम को बदल दिया गया और करीब 50 कर्मचारियों को हटाने की बात सामने आई है। आउटसोर्स कर्मचारियों को भी बाहर का रास्ता दिखाया गया है।

चर्चा में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के नामों को लेकर भी सवाल उठे। यह कहा गया कि बिना इन पर कार्रवाई के इस विवाद के दाग मिटाना मुश्किल हो सकता है। वहीं यह भी सवाल उठा कि क्या यह लापरवाही थी, संलिप्तता थी या फिर क्षमता की कमी का मामला।

जिम्मेदारी बनाम आरोपों पर बहस

पैनल में इस बात पर बहस हुई कि किसी भी संगठन में ऐसी गड़बड़ी होने पर शीर्ष पदों पर बैठे लोगों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। हालांकि, कुछ मेहमानों ने कहा कि बिना ठोस सबूत के किसी को दोषी ठहराना सही नहीं है और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए।

VHP ने किया बचाव

विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता ने चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन राम जन्मभूमि आंदोलन को समर्पित किया है और उनके ऊपर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

आस्था और पारदर्शिता पर सवाल

पूरे मामले ने आस्था से जुड़े इस बड़े संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि भविष्य में इस तरह के विवाद से बचने के लिए मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है। अब सभी की नजरें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।

डिटेल में पूरी चर्चा देखने के लिए सबसे ऊपर दिए गए वीडियो पर क्लिक करें।

(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)

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