लखनऊ: समजावादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि महिला आरक्षण बिल बीजेपी की दरारवादी राजनीति का काला दस्तावेज था जिसे विपक्ष ने सामूहिक प्रयासों से विफल कर दिया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण पर बीजेपी की हार हुई है। बीजेपी का हर प्रयास लोगों को बांटने का होता है।बीजेपी महिलाओं की एकता में दरार डालकर ठगना चाहती थी लेकिन उनके मंसूबों को विपक्ष ने धूल चटा दी। ये बीजेपी के खिलाफ सक्रिय हो चुकी देश की जनचेतना की जीत है। अखिलेश ने कहा कि बीजेपी नारी को नारा बनाने की कोशिश कर रही थी।
नारी के अधिकार का हनन
अखिलेश यादव ने कहा कि परिसीमन के नाम पर ये बिल भी रूप बदलकर नारी के अधिकार का हनन करने आया था। लगभाग 95 प्रतिशत पीडीए महिलाओं के खिलाफ लाया गया था। उन्होंने कहा कि पहले जनगणना कराई जाए फिर परिसीमन होना चाहिए।
पहले जनगणना, फिर परिसीमन
आधा-अधूरा महिला आरक्षण बिल लाने का नाटक किया गया। उन्होंने कहा कि पहले जनगणना कराई जाए फिर परिसीमन होना चाहिए। अखिलेश ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के बजाय तुष्टिकरण की कोशिश है। हम महिलाओं के खिलाफ नहीं हैं, हम उन्हें सच्चा प्रतिनिधित्व देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि संशोधन के नाम पर बीजेपी जल्दबाजी दिखा रही थी ताकि जनगणना न करानी पड़े। जनगणना होने पर जातिगत आरक्षण भी देना पड़ेगा। ये बीजेपी की बहुत बड़ी चाल थी।
बीजेपी की चालबाजी का विरोध
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर जब लोकसभा में चर्चा हो रही थी उस वक्त भी अखिलेश ने आरोप लगाया था कि भाजपा महिला आरक्षण विधेयक के बहाने ''नारी को नारा बनाने'' की कोशिश कर रही है। सपा प्रमुख ने महिला आरक्षण से संबंधित तीन विधेयकों पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा था कि उनकी पार्टी महिलाओं के लिए आरक्षण के समर्थन में है, लेकिन ''भाजपाई चालबाजी'' के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया, ''भाजपा इस (महिला) आरक्षण को लेकर नारी को नारा बनाने की कोशिश कर रही।
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