गांदरबल/श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में एक साल बाद फिर सायरन की आवाज सुनाई दी, लेकिन इस बार यह किसी खतरे का संकेत नहीं था, बल्कि आपातकालीन तैयारियों का हिस्सा था। जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में 'एयर रेड मॉक ड्रिल' आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी को परखना था। यह मॉक ड्रिल जम्मू-कश्मीर सिविल डिफेंस टीम की 'आपातकालीन तैयारी और सुरक्षा प्रशिक्षण' पहल के तहत आयोजित की गई। इसके तहत रात 8:00 बजे से 8:10 बजे तक पूरे इलाके में ब्लैकआउट रखा गया, यानी लोगों से अपनी बत्तियां बंद करने को कहा गया।
अभ्यास के दौरान हवाई हमले जैसी स्थिति का प्रदर्शन
गांदरबल जिले के एक डिग्री कॉलेज में इस अभ्यास के दौरान हवाई हमले जैसी स्थिति का प्रदर्शन किया गया। इस मॉक ड्रिल में SDRF, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं तथा स्वास्थ्य विभाग ने सिविल डिफेंस विंग के साथ मिलकर हिस्सा लिया। अभ्यास के दौरान यह दिखाया गया कि किसी आपात स्थिति में आम लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है, घायलों को अस्पताल तक कैसे पहुंचाया जाता है और आग लगने की स्थिति में उसे कैसे बुझाया जाता है। इस दौरान इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का भी प्रदर्शन किया गया।
छात्रों और स्थानीय लोगों को दी गई बचाव की ट्रेनिंग
मॉक ड्रिल में शामिल छात्रों और स्थानीय लोगों को यह भी सिखाया गया कि हवाई हमले, प्राकृतिक आपदा या भूकंप जैसी स्थितियों में क्या करना चाहिए। उन्हें बताया गया कि सायरन बजने पर कैसे प्रतिक्रिया दें, कैसे सुरक्षित स्थान पर जाएं और किस तरह जान बचाई जा सकती है। इसके अलावा, विभिन्न विभागों के बीच तालमेल कैसे बनाया जाता है, यह भी अभ्यास के जरिए दिखाया गया। लोगों को यह संदेश दिया गया कि ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि तय नियमों का पालन करना जरूरी है।
'ऑपरेशन सिंदूर' से पहले भी कराई गई थी मॉक ड्रिल
इस अभ्यास का एक उद्देश्य यह भी था कि यदि किसी विभाग की तैयारी में कोई कमी रह जाती है, तो उसे समय रहते सुधारा जा सके और सभी एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत किया जा सके। कुपवाड़ा, अनंतनाग और गांदरबल के उपायुक्तों ने भी जनता से अपील की थी कि ड्रिल के दौरान निर्धारित समय पर अपनी बत्तियां बंद रखें और प्रशासन का सहयोग करें। बता दें कि इस तरह की मॉक ड्रिल पिछले साल 'ऑपरेशन सिंदूर' से पहले भी कराई गई थी, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सीमित संघर्ष हुआ था। इस बार भी प्रशासन ऐसी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।