जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले में पहाड़ी की ढलान पर स्थित एक गांव में भूमि धंसाव से 50 आवासीय ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए, जिनमें अधिकांश रिहायशी मकान थे। जम्मू कश्मीर के मंत्री जावेद अहमद राणा ने अपने मेंढर निर्वाचन क्षेत्र के प्रभावित कलाबन गांव का दौरा किया। प्रभावित लोगों को पर्याप्त राहत और पुनर्वास का आश्वासन दिया गया।
गांव को जाने वाली सड़क भी क्षतिग्रस्त
अधिकारियों ने कहा कि भूमि धंसने से तीन स्कूल भवन, एक मस्जिद, एक कब्रिस्तान और गांव को जाने वाली सड़क भी क्षतिग्रस्त हो गई। यहां अब भी भूमि धंस रही है, जिससे स्थानीय निवासियों में दहशत फैल गई है।
20 अन्य मकानों में भी दरारें आईं
जल शक्ति, वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण तथा जनजातीय मामलों का प्रभार संभाल रहे राणा ने गांव में दौरा करते समय संवाददाताओं से कहा, ‘यह मेरा पैतृक गांव है जो पिछले कुछ दिनों से भूमि धंसने की समस्या का सामना कर रहा है। हाल ही में पुंछ, राजौरी और कश्मीर के विभिन्न हिस्सों से भूमि धंसने की खबरें आई थीं, जो जाहिर तौर पर भारी बारिश के कारण हुई।’ उन्होंने कहा कि 25 से अधिक आवासीय मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं और 20 अन्य मकानों में दरारें आ गई हैं, जिससे वे असुरक्षित हो गए हैं।
करीब 700 लोग भूमि धंसने से प्रभावित
मंत्री ने कहा, ‘गांव की आधी आबादी, यानी करीब 700 लोग भूमि धंसने से प्रभावित हैं। मैंने सरकार की ओर से स्थानीय प्रशासन को प्रभावित आबादी के अस्थायी पुनर्वास और नियमों के अनुसार तत्काल राहत प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। उनके स्थायी पुनर्वास के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।’
पर्याप्त मुआवजा देने का आश्वासन
मंत्री ने प्रभावित लोगों को उनके नुकसान के लिए पर्याप्त मुआवजा देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर जल निकासी की कमी ऐसी स्थिति का मुख्य कारण है तथा उन्होंने सड़क सहित किसी भी विकासात्मक परियोजना के कार्यान्वयन के दौरान सरकार की किसी भी कमी की पहचान करने में नागरिक समाज से सहयोग मांगा।
करोड़ों के मकान एक झटके में बर्बाद
राणा ने कहा, ‘इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए जल निकासी आवश्यक है।’ पीड़ितों में से एक राशिद चौहान ने सरकारी मदद की भावुक अपील करते हुए कहा कि भूमि धंसने से वे बेघर हो गए हैं। उन्होंने कहा, ‘हमने कंक्रीट के मकान बनाए थे जिनकी कीमत करोड़ों रुपये है लेकिन वे बर्बाद हो गए।’
SDRF की टीम है तैनात
उन्होंने राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) के कर्मियों की प्रशंसा की, जिन्हें क्षतिग्रस्त मकानों से लोगों को निकालने में मदद के लिए गांव में तैनात किया गया था। इससे पहले मेंढर के उप-मंडल मजिस्ट्रेट इमरान राशिद कटारिया ने बताया था कि वे स्थिति पर नजर रखे हुए है और विस्थापित परिवारों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारी ने यह भी बताया कि गांव में भूमि धंसना अभी भी जारी है और प्रशासन की पहली प्राथमिकता प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है। (भाषा के इनपुट के साथ)