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जम्मू कश्मीर: AI से होगी ट्रेनों की निगरानी, जानें इंडियन रेलवे ने घाटी के लिए क्या बनाया है प्लान

जम्मू कश्मीर में कई तरह के बदलाव आ रहे हैं जिसमें सबसे अहम है रेल यातायात में बेहतर सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण सुधार। रेल मंत्रालय ने कहा है कि एब ट्रेनों की निगरानी एआई से कराने की तैयारी चल रही है।

जम्मू कश्मीर में दौड़ती ट्रेन- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO जम्मू कश्मीर में दौड़ती ट्रेन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जून, 2025 को चिनाब और अंजी पुलों के साथ उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लिंक परियोजना का उद्घाटन किया था जिससे जम्मू-श्रीनगर रेल लाइन के खुलने और अपग्रेड कार्यों से जम्मू-कश्मीर को एक नई लाइफलाइन मिलेगी। भारतीय रेलवे ने कहा कि कश्मीर घाटी में यात्री सवारी डिब्बों को अपग्रेड करने का काम 31 अगस्त तक पूरा हो जाएगा और इस समय सीमा के भीतर सेवा में मौजूद सभी रेकों को रेनोवेट और अपग्रेड किया जाएगा।

मील का पत्थर साबित हुई है वंदे भारत

कटरा और श्रीनगर के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन अब परिवहन का एक महत्वपूर्ण साधन बन गई है और नई रेल सेवाओं के अलावा, इस लाइन के खुलने से कश्मीर घाटी में रेल पटरियों के रखरखाव की क्षमता में भी बुनियादी बदलाव आया है। इस रेलवे लिंक ने कश्मीर घाटी में ट्रैक रखरखाव मशीनों की आवाजाही को संभव बनाया है। पहले मैन्युअली रखरखाव के विपरीत, अब आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पटरियों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।"

ट्रैक सुरक्षा से सुधरी यात्रा की गुणवत्ता

अब रेलवे पटरियों को अपग्रेड किया जा रहा है, जिससे बेहतर ट्रैक सुरक्षा से यात्रा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। वर्ष 2025 की शुरुआत तक, भारत के 78 प्रतिशत ट्रैक 110 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक की गति तक अपग्रेड हो चुके हैं। वर्ष 2014 में यह संख्या सिर्फ 39 प्रतिशत थी। मंत्रालय ने कहा, "वर्ष 2014 में पटरियों की कुल लंबाई 79,342 किलोमीटर थी जो आज बढ़कर एक लाख किलोमीटर से अधिक हो गई है।"

एआई का होगा इस्तेमाल

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "हम ट्रैक तकनीक और रखरखाव प्रक्रियाओं को अपग्रेड कर ट्रैक की गुणवत्ता में सुधार करेंगे। इसके लिए आधुनिक ट्रैक फिटिंग, ट्रैक मशीनों का उपयोग, अल्ट्रा साउंड फ्रैक्चर डिटेक्शन मशीनें, रोड-कम-रेल वाहन और इंटीग्रेटेड ट्रैक माप मशीनें हमारे ट्रैक रखरखाव को साइंटिफिक बना देंगी, साथ ही एआई का इस्तेमाल डिफेक्ट का पता लगाने में बड़े पैमाने पर किया जाएगा। इन तकनीकी परिवर्तनों से ट्रैक रखरखाव कर्मचारियों के लिए काम करने की स्थिति में काफी सुधार होगा।"