नया साल 2020 शुरू हो रहा है। बीते साल से आपको काफी शिकायतें रही होंगी, कुछ रिश्ते बने होंगे तो कुछ टूटे भी होंगे। लेकिन टूटे रिश्तों को जोड़ने को लिए नए साल के मौके को हाथ से मत जाने दीजिए। वक्त रेत की तरह हाथों से तेजी से फिसल जाता है, जो इन रिश्तों को वक्त के साथ नहीं जी पाता वो बाद में पछताता है। क्या वाकई आपने पिछले साल अपनी जिंदगी को सकून से जिया। अगर नहीं तो कुछ प्लानिंग कीजिए ताकि आप जिंदगी को सही मायनों में जी सकें। रिश्तों की गर्माहट को बनाए रखने के लिए कुछ छोटे छोटे जतन करेंगे होंगे और आपके रिश्ते फिर खिलखिलाकर हंस पड़ेंगे। बस इन छोटे छोटे तरीके को करते वक्त चेहरे और दिल में खुशी रखिएगा।
पड़ोसी के घर कब से नहीं गए
पड़ोसियों से रिश्ते मजबूत कीजिए
पड़ोसी चुने नहीं जा सकते, ये आपको किस्मत से मिलते हैं। ये लाइन आपने भी कई बार सुनी होगी। अब आपके ऊपर है कि पड़ोसी से कैसे रिश्ते चाहते हैं, जैसे रिश्ते चाहते हैं, उसकी पहल खुद कीजिए...बातचीत कीजिए, घर जाइए, लंच या डिनर पर बुलाइए, याद रखिए इमरजैंसी में यही काम आएंगे, इसलिए इनके भी काम आइए। निकलते बढ़ते हाय हैलो, वीकेंड पर कुछ पार्टी जैसा, ज्यादा नहीं तो कटोरियों के जरिए मीठे की आवाजाही रिश्तों में स्वाद घोल देती है।
लास्ट डिनर डेट याद है?
आपको याद है कि आप अपने पार्टनर के साथ डिनर डेट पर आखिरी बार कब गए थे। लो जी, दफ्तर की भागदौड़ में भूल गए...एनिवर्सरी, बर्थडे ही याद रखना जरूरी नहीं है, रिश्तों में गर्माहट होनी चाहिए, वरना एक्सपायरी लगते देर नहीं लगती। लौटते हुए मीठा ले आइए, आधी रात को कॉफी बनाकर पिलाइए, अचानक जल्दी घर पहुंच कर सरप्राइज दे दीजिए, बंक मारकर डेट पर चले जाइए। मेट्रो स्टेशन पर मिलना कैसा रहेगा? चोरी छिपे चैटिंग कीजिए, बिलकुल नए नवेले प्रेमियों की तरह। रीबूट होंगे रिश्ते तो ही मजबूत होंगे रिश्ते।
बच्चों की PTM में गए थे क्या
बच्चों से मजबूत कीजिए रिश्ता
याद रखिए आप अगर माता पिता हैं तो आपकी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। निजी रिश्तों के साथ साथ इन बच्चों का बचपन भी आपके हाथों में है। इनके लिए भी आपकी जिम्मेदारियां है, केवल स्कूल भेजने और अच्छा खाने से ही बच्चों के प्रति काम पूरा नहीं हो जाता। नए साल पर उनके लिए वक्त निकालिए...मां या पापा बनकर नहीं..उनका साथी बनकर...सीक्रेट्स शेयर कीजिए, पार्क में घूमने जाइए, गुड़िया गुड्डे के खेल कीजिए...बच्चों को मां बाप का साथ अगर साथी के रूप में मिल जाए तो क्या कहने?