शोधकर्ताओं को पता चला है कि जो बच्चे अपने माता-पिता से लगातार उपेक्षित रहते हैं, वे स्वभाव से बहुत ज्यादा अंतर्मुखी हो जाते हैं। उनमें आत्मविश्वास की कमी तथा असुरक्षित व्यक्तित्व होता है। कई बच्चे निर्णय लेने में असमर्थ रहते हैं, क्योंकि वे यह तय नहीं कर पाते कि वे जो कर रहे हैं, वह सही है या गलत। उनका सामाजिक कौशल काफी खराब होता है और वयस्क होने पर अपने कार्यस्थल पर टीम के अच्छे सदस्य नहीं कहलाते।
प्रतिष्ठित न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. नीति देसाई ने मां से हुई बातचीत के बारे में बताया, "अक्सर मां मेरे पास अपने बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति चिंतित अवस्था में आती हैं, क्योंकि उनका बच्चा अनियमित आहार लेता है और अक्सर बीमार पड़ जाता है। मां को हर चीज के लिए अपने बच्चों के पीछे भागना पड़ता है और फिक्रमंद मां होने के कारण उन्हें कई सारी चीजों के लिए न कहना पड़ता है।"
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