A
Hindi News मध्य-प्रदेश प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने लाउडस्पीकर के जरिए जोर-जोर से अजान कहे जाने पर उठाए सवाल

प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने लाउडस्पीकर के जरिए जोर-जोर से अजान कहे जाने पर उठाए सवाल

भोपाल जिले के बैरसिया कस्बे में मंगलवार रात को एक मंदिर में ठाकुर ने कहा, ‘‘सुबह पांच बजकर कुछ मिनट पर बहुत जोर-जोर से आवाजें आती है और वो आवाजें लगातार चलती रहती हैं। सबकी नींद हराम होती है। सबकी नींद खराब होती है।’’

प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने लाउडस्पीकर के जरिए जोर-जोर से अजान कहे जाने पर उठाए सवाल- India TV Hindi Image Source : PTI प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने लाउडस्पीकर के जरिए जोर-जोर से अजान कहे जाने पर उठाए सवाल

भोपाल: भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने लाउडस्पीकर के जरिए जोर-जोर से अजान कहे जाने पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि सुबह के समय बहुत जोर-जोर की आवाजें आती हैं, जिससे न केवल लोगों की नींद खराब होती है बल्कि कुछ मरीजों का रक्तचाप भी बढ़ जाता है, जबकि साधु-सन्यासी 'ब्रह्म मुहूर्त' में ध्यान में लगे रहते हैं। ठाकुर ने आरोप लगाया कि जब मंदिरों में आरती के समय माइक लगा दिया जाता है तो कुछ लोगों को बड़ी पीड़ा होती है और कहते हैं कि हम किसी और इबादत का कोई शब्द नहीं सुन सकते। 

भोपाल जिले के बैरसिया कस्बे में मंगलवार रात को एक मंदिर में ठाकुर ने कहा, ‘‘सुबह पांच बजकर कुछ मिनट पर बहुत जोर-जोर से आवाजें आती है और वो आवाजें लगातार चलती रहती हैं। सबकी नींद हराम होती है। सबकी नींद खराब होती है।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘कुछ लोग मरीज भी होते हैं, इससे उनका रक्तचाप भी बढ़ जाता है। किसी को कोई तकलीफ, किसी को कोई तकलीफ होती है। किसी को रात भर नींद नहीं आती है तो जब वो सुबह निद्रा में होता है तो आवाज से विघ्न पैदा होती है और सच बताऊँ तो साधु-संन्यासी जो होते है उनकी ध्यान-साधना का समय चार बजे ब्रह्म मुहूर्त से होता है।’’ हालांकि, उन्होंने अपने बयान में अजान शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। 

ठाकुर ने कहा, ‘‘हमारी प्रथम आरती का समय भी सुबह चार बजे से ब्रह्म मुहूर्त से प्रारम्भ होता है। लेकिन किसी को कोई परवाह नहीं है इस बात की (लाउडस्पीकर के जरिए बहुत जोर-जोर से अजान कहे जाने की)। वो जबरदस्ती के माइक हमारे कानों में गूंजते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘और जब हम (हिन्दू लोग मंदिर में आरती करने के लिए) माइक लगा लेते हैं तो विधर्मियों को बड़ी पीड़ा होती है। कहते हैं कि हम किसी और इबादत का कोई शब्द नहीं सुन सकते, क्योंकि हमारे धर्म में, हमारे इस्लाम में, ये ठीक नहीं माना जाता और हमारे इस्लाम में ये जायज नहीं माना जाता।’’