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ट्विशा शर्मा डेथ केस: आरोपी पति समर्थ सिंह पर गिरी गाज, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने निलंबित किया वकालत का लाइसेंस

ट्विशा शर्मा डेथ केस में आरोपी पति समर्थ सिंह के वकालत का लाइसेंस, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने निलंबित कर दिया है। गौरतलब है कि ये डेथ केस काफी चर्चा में बना हुआ है।

Twisha Sharma death case - India TV Hindi
Image Source : VIRAL ON SOCIAL MEDIA ट्विशा शर्मा डेथ केस: आरोपी पति समर्थ सिंह का वकालत का लाइसेंस निलंबित

भोपाल: देश में चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस में एक बड़ी खबर सामने आई है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने आरोपी पति समर्थ सिंह के वकालत के लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन की अवधि के दौरान, समर्थ किसी भी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकरण मंच के सामने उपस्थित नहीं होंगे। इस दौरान वह न ही कार्य करेंगे और न ही पैरवी करेंगे। वह विधि व्यवसाय भी नहीं करेंगे और वकालतनामा दाखिल नहीं करेंगे। वह स्वयं को विधि व्यवसाय करने के लिए अधिकृत होने के रूप में प्रस्तुत नहीं करेंगे।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन ने पत्र में क्या लिखा

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन ने पत्र में लिखा, "वर्तमान प्रकरण श्रीमती ट्विशा शर्मा, पत्नी श्री समर्थ सिंह, अधिवक्ता, की विवाह के कुछ ही महीनों के भीतर भोपाल स्थित उनके वैवाहिक घर में हुई मृत्यु से उत्पन्न गंभीर आरोपों से संबंधित है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के संज्ञान में यह लाया गया है कि श्री समर्थ सिंह, अधिवक्ता, एवं अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध दहेज मृत्यु, क्रूरता तथा संबंधित अपराधों के आरोपों के संबंध में एक एफआईआर दर्ज की गई है। यह भी सूचित किया गया है कि श्री समर्थ सिंह, अधिवक्ता, जो मृतका के पति हैं, फरार हैं तथा जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।"

पत्र में लिखा गया, "आरोप अत्यंत गंभीर हैं और इनका विधिक पेशे की गरिमा, अनुशासन तथा सार्वजनिक छवि पर सीधा प्रभाव पड़ता है। एक अधिवक्ता मात्र निजी व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह न्यायालय का अधिकारी तथा एक विनियमित पेशे का सदस्य होता है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया पर यह वैधानिक दायित्व है कि वह विधिक पेशे की पवित्रता बनाए रखे तथा यह सुनिश्चित करे कि अधिवक्ताओं का आचरण न्याय प्रशासन में जनता के विश्वास को कमजोर न करे। आरोपों की गंभीरता, अपनी पत्नी की हत्या में अधिवक्ता की भूमिका, आपराधिक कार्यवाही के पंजीकरण, संबंधित अधिवक्ता के मृतका के पति होने के तथ्य, तथा इस अतिरिक्त परिस्थिति कि वह कथित रूप से फरार है, को दृष्टिगत रखते हुए, विधिक पेशे तथा जनता के विश्वास के हित में एक तात्कालिक अंतरिम आदेश पारित किया जाना आवश्यक समझा जाता है।"

पत्र में लिखा गया, "तदनुसार, श्री समर्थ सिंह, अधिवक्ता, को तत्काल प्रभाव से अधिवक्ता के रूप में विधि व्यवसाय करने से निलंबित किया जाता है, जब तक कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया और/अथवा उपयुक्त अनुशासनात्मक समिति द्वारा इस विषय पर आगे विचार न किया जाए। निलंबन की अवधि के दौरान, श्री समर्थ सिंह, अधिवक्ता, भारत के किसी भी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकरण अथवा मंच के समक्ष उपस्थित नहीं होंगे, कार्य नहीं करेंगे, पैरवी नहीं करेंगे, विधि व्यवसाय नहीं करेंगे, वकालतनामा दाखिल नहीं करेंगे, और न ही स्वयं को विधि व्यवसाय करने के लिए अधिकृत होने के रूप में प्रस्तुत करेंगे। इस प्रकरण को यथाशीघ्र उपयुक्त अनुशासनात्मक समिति/सक्षम वैधानिक निकाय के समक्ष रखा जाएगा, ताकि विधि के अनुसार उपयुक्त अवसर प्रदान करने के पश्चात पुष्टि, संशोधन, निरस्तीकरण अथवा अन्य आवश्यक आदेश पारित किए जा सकें।"