मुंबई: एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशिधर जगदीशन के खिलाफ लीलावती ट्रस्ट द्वारा दायर मामला वास्तविक आपराधिक कृत्य के बजाय व्यक्तिगत परेशानियों के कारण उत्पन्न हुआ। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस केस को लेकर टिप्पणी की।
जगदीशन के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करते हुए अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि एचडीएफसी बैंक द्वारा ट्रस्ट के खिलाफ शुरू की गई वसूली प्रक्रिया के परिणामस्वरूप लीलावती ट्रस्ट ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था।
कोर्ट ने कहा, "वसूली की कार्यवाही के नाम पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला व्यक्तिगत वैमनस्य हस्तक्षेप करने का एक ठोस कारण है।"
व्यक्तिगत द्वेष से प्रेरित थी FIR
मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि जगदीशन ने पूर्व ट्रस्टियों से 2.05 करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी। यह कथित राशि वसूली प्रक्रिया में हेरफेर करने के लिए दी गई थी, ऐसा दावा किया गया था।
न्यायमूर्ति एम. एस. कर्णिक और एन. आर. बोरकर की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि लीलावती कीर्तीलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट द्वारा दायर शिकायत, एचडीएफसी बैंक द्वारा 65 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि वसूलने के लिए शुरू की गई कार्यवाही का जवाब थी।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया, "हमें पूरा विश्वास है कि लीलावती ट्रस्ट और ट्रस्टी प्रशांत मेहता द्वारा दायर शिकायत वित्तीय संस्थानों द्वारा शुरू की गई वसूली कार्यवाही का ही परिणाम है। यह शिकायत उसी कार्यवाही का जवाब है और उपलब्ध साक्ष्य इस मामले की जांच का बिल्कुल समर्थन नहीं करते।"
जगदीशन कौन हैं?
शशिधर जगदीशन, HDFC बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर हैं और उनके पास लंबा कार्य अनुभव है। वह चार्टर्ड अकाउंटेंट भी हैं अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री किए हुए हैं। उन्होंने 1996 में बैंक के फाइनेंस विभाग में मैनेजर के रूप में कार्यभार संभाला था।