'कई-कई दिनों तक रहा भूखा... मन तो नहीं करता पर जाना पड़ता है विदेश', जानिए ऐसा क्यों बोले धीरेंद्र शास्त्री?
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने विरोधियों पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने अपने स्ट्रगल को याद कर कहा कि वह कई-कई दिन तक भूखे रहे हैं। ऊंचाइयों पर जाने के लिए कठिनाइयों का सामना किया है।
मुंबई में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 50 लाख पर नया बयान दिया है। उन्होंने इशारों में जवाब दिया है। उन्होंने कहा, 'ऊंचाइयों पर जाने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अभी लोगों को बागेश्वर बाबा.. बागेश्वर बाबा सुनाई देता है लेकिन उसके लिए कितनी कठिनाइयों मैंने सही हैं। वह लोगों को दिखाई नहीं देता है।'
विदेश जाना है जरूरी, बताई वजह
इसके बाद भी धीरेंद्र शास्त्री नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, 'कितने दिन मैं भूखे रहा? कितनी रातें मैं सोया नहीं? यह लोगों को दिखाई नहीं देता है। विदेश जाना जरूरी है, क्योंकि नहीं जाएंगे तो दक्षिणा नहीं मिलेगी तो हॉस्पिटल नहीं बन पाएगा। अन्नपूर्णा का भोज नहीं हो पाएगा। इसीलिए जाना पड़ता है। मन तो नहीं करता लेकिन जाना पड़ता है। इसके साथ ही बाबा बागेश्वर ने कहा कि मजबूरी का नाम महात्मा गांधी है।
कथा के लिए नहीं मांगी दक्षिणा- धीरेंद्र शास्त्री
पैसे तो लेता हूं वाले बयान पर 8 दिन पहले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा था, 'सच तो ये है कि हमने कभी कथा के लिए दक्षिणा नहीं मांगी है। जो व्यवस्था है, सिर्फ व्यवस्था मांगी है।' उनका कहना था कि व्यवस्था में पंडाल, भंडारे, कलाकारों और गाड़ियों का इंतजाम और रहने की व्यवस्था शामिल होती है।
अन्नपूर्णा भंडारे के लिए लिया जाता है सहयोग
उनका यह भी कहना था कि अन्नपूर्णा भंडारे के लिए सहयोग लिया जाता है। उन्होंने 50 लाख या एक करोड़ रुपये की मांग की अफवाहों को खारिज करते हुए कहा था, 'व्यवस्था में चाहे जितना खर्च हो जाए, कथा बिल्कुल भी महंगी नहीं है, ये बेफिजुली की अफवाह है।'
कथा वाचक की पिटाई पर क्या बोले धीरेंद्र शास्त्री?
इटावा में कथा वाचक की पिटाई के मामले पर भी बाबा बागेश्वर ने बयान दिया है। उन्होंने कहा, 'हम जातिवाद के पक्ष में नहीं हैं। चाहे वो कोई भी हों लेकिन जाति बदलकर के आपको दूसरी जातियों के नाम का सहारा लेकर भगवान की कथा कहने के लिए भगवान के साथ फ्रॉडगीरी भी नहीं करनी चाहिए।'
कास्टिज्म नहीं, राष्ट्रिज्म के ऊपर खेल खेलना होगा
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, 'हिंदुओं कान खोलकर सुनो जातियों की राजनीति करोगे तो देश का बंटाधार हो जाएगा। देश को विश्वगुरू बनाना है देश को न्यूजीलैंड, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसा बनाना है तो जातियों से ऊपर उठकर अब भैय्या कास्टिज्म के ऊपर नहीं, राष्ट्रिज्म के ऊपर खेल खेलना पड़ेगा। कास्टवाद से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद पर जीना पड़ेगा। ये बात सही है कि किसी का सिर नहीं मुड़ाना चाहिए, चोटी नहीं काटनी चाहिए। जिन्होंने ये काम किया ठीक नहीं किया है।'
